
बिलासपुर जिले में जल संरक्षण को लेकर ‘मोर गांव मोर पानी’ महा-अभियान जोर पकड़ रहा है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर 486 ग्राम पंचायतों में संगोष्ठियों, जनभागीदारी और श्रमदान से जल बचाने का संदेश दिया जा रहा है। जल संकट की आशंका वाले क्षेत्रों में लोगों को भूजल के कम उपयोग और फसल चक्र परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा है।अभियान के तहत बोरी बंधान, सैंड फिल्टर, पर्कोलेशन टैंक और इंजेक्शन वेल जैसी तकनीकों से भूजल स्तर को पुनर्जीवित करने का काम शुरू हो चुका है।

ग्रामीण भी बढ़-चढ़कर इसमें भाग ले रहे हैं। जलदूत मोबाइल ऐप के जरिए मानसून से पहले और बाद में जल स्तर मापा जा रहा है, जिसकी जानकारी सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित की जा रही है।केंद्रीय ग्राउंडवाटर बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, बिल्हा और तखतपुर विकासखंड सेमी क्रिटिकल जोन में हैं। ऐसे में प्रशासन ने इन क्षेत्रों में विशेष जागरूकता अभियान छेड़ दिया है। मनरेगा के तहत भी जल संरचनाओं पर काम तेज है। ग्रामीणों को शपथ दिलाकर जल के प्रति जिम्मेदार बनाने की दिशा में यह अभियान एक अहम कदम साबित हो रहा है।




