
बिलासपुर में दो अलग-अलग इलाकों में जबरन धर्मांतरण को लेकर बवाल मच गया। शिवविहार कॉलोनी में प्रार्थना सभा की आड़ में बाइबिल पढ़ाकर लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। सूचना पर पहुंचे हिंदूवादी संगठनों ने पुलिस को बुलाया, जिसके बाद चार लोगों को हिरासत में लिया गया। आरोप है कि टी सूर्या राव के घर हर रविवार इस तरह की सभा होती थी, जहां जरूरतमंदों को पैसों और इलाज का लालच देकर धर्म बदलवाया जाता था।इधर, चकरभाठा थाना क्षेत्र में रहने वाले मयंक पांडेय ने अपनी पत्नी और एक स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने की शिकायत दर्ज कराई है। मयंक का आरोप है कि उसकी पत्नी रंजना पांडेय ने केस खत्म करने और 50 हजार रुपए देने के बदले धर्म बदलने की बात कही। साथ ही मरवाही डीएवी स्कूल की प्रिंसिपल केरोलाइन मैरी ने भी बाइबिल लेकर धर्म परिवर्तन का सुझाव दिया और अच्छी नौकरी का लालच दिया।पुलिस ने दोनों मामलों में आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया है। कानून के मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति का धर्म जबरन या प्रलोभन देकर बदला गया है और उसने इसकी सूचना प्रशासन को नहीं दी, तो वह धर्मांतरण अवैध माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर 3 से 10 साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की आज़ादी देता है, लेकिन जबरन या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों को रोकने के लिए केंद्र सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है, ताकि धार्मिक स्वतंत्रता की आड़ में कोई भी व्यक्ति दूसरों की आस्था से खिलवाड़ न कर सके।




