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वार्ड पार्षद के ज्ञापन पर अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ निगम की बड़ी कार्रवाई शुरुआती जांच में 25 लोगों को नोटिस, अब होगी कठोर जांच और कार्रवाई

बिलासपुर के वार्ड नंबर 13 में धड़ल्ले से चल रही अवैध प्लॉटिंग पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। पार्षद रमेश पटेल द्वारा इस मामले को कलेक्टर के संज्ञान में लाने के बाद नगर निगम हरकत में आया। कलेक्टर ने पूरा मामला नगर निगम को सौंपा और निगमायुक्त के निर्देश पर जोन कमिश्नर ने मौके का निरीक्षण किया। जांच के शुरुआती दौर में निगम ने 25 लोगों को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। बिलासपुर शहर से सटी नई बस्तियों में अब अवैध प्लॉटिंग के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। खासकर वार्ड 13 के पंडित दीनदयाल नगर, चड्डा बड़ी, यादव गली और पाठ बाबा क्षेत्र में जमीन काटकर धड़ल्ले से प्लॉट बेचे जा रहे हैं। बिना नक्शा पास, बिना जलनिकासी, बिना सड़क और बिना बिजली—बावजूद इसके प्लॉटिंग जारी है और लोगों को घर बसाने का सपना दिखाया जा रहा है।इस पूरे मामले की जानकारी मिलते ही वार्ड पार्षद रमेश पटेल तुरंत कलेक्टोरेट पहुंचे और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। पार्षद ने अवैध प्लॉटिंग को लेकर गहरी चिंता जताई और कहा कि इससे न सिर्फ नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि भविष्य में लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। कलेक्टर ने मामले में तुरंत संज्ञान लेते हुए इसे नगर निगम को कार्रवाई हेतु भेजा।निगमायुक्त के निर्देश पर जोन कमिश्नर रंजना अग्रवाल ने निगम की टीम के साथ मौके का दौरा किया।

इलाके में बने गैरकानूनी प्लॉटों और अवैध निर्माण की जांच की गई। उन्होंने बताया कि बिना किसी अनुमति के जमीनों को काटकर बेचा जा रहा है। इस संबंध में अभी तक लगभग 25 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं और आगे की कार्रवाई आयुक्त के आदेशानुसार की जाएगी।पंडित दीनदयाल नगर की EWS कॉलोनी, अमन विहार, यादव गली और आसपास के क्षेत्र में इस तरह की अवैध प्लॉटिंग खुलेआम की जा रही है। कई जगहों पर सिर्फ मुरुम डालकर विकास का दिखावा किया जा रहा है, जबकि जलनिकासी, बिजली, नाली जैसी मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं। सवाल ये है कि आखिर इन भू-माफियाओं को इतनी छूट कैसे मिल गई? और जो लोग इन प्लॉटों में रह रहे हैं, उनके अधिकारों की रक्षा कौन करेगा।जोन कमिश्नर ने कहा हमें जैसे ही जानकारी मिली, हमने तत्काल टीम भेजकर सर्वे कराया। अभी प्रारंभिक तौर पर 25 नोटिस जारी किए गए हैं। जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अब देखना होगा कि निगम की कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक सीमित रहती है या सख्त एक्शन भी देखने को मिलेगा। इस मामले ने एक बार फिर अवैध प्लॉटिंग और सिस्टम की निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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