अधूरा प्रोजेक्ट और पेड़ कटाई पर विवादरेलवे प्रबंधन के खिलाफ फूटा आक्रोश

बिलासपुर रेलवे स्टेशन का री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट एक बार फिर विवादों में है। करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा कर रेलवे ने काम की शुरुआत तो जोर-शोर से की थी, लेकिन पिछले छह महीनों से यह प्रोजेक्ट ठप पड़ा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि विकास कार्य के नाम पर स्टेशन परिसर में मौजूद दशकों पुराने छायादार पेड़ों को काट दिया गया, और अब उन्हें अधूरा छोड़ दिया गया है। इस लापरवाही से यात्रियों और स्थानीय लोगों में गुस्सा फूट पड़ा है। देश के ए ग्रेड स्टेशनों में गिने जाने वाले बिलासपुर रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये का टेंडर जारी किया गया था। यात्रियों को वर्ल्ड क्लास सुविधाएं देने, नए प्लेटफार्म और स्टेशन भवन बनाने की बात कही गई थी। लेकिन नतीजा उल्टा निकला। काम आधे में ही रोक दिया गया और जो बदलाव हुए, उन्होंने यात्रियों की परेशानियां और बढ़ा दीं। स्टेशन परिसर और आसपास के क्षेत्रों में लगे वर्षों पुराने विशाल वृक्षों को जड़ से उखाड़कर काट दिया गया।

ये वही पेड़ थे, जिनकी छांव में यात्री तपती गर्मी और बारिश में राहत पाते थे। आज उनकी जगह केवल धूल और मलबा बचा है।स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि रेलवे ने विकास के नाम पर प्राकृतिक विरासत को बर्बाद कर दिया। बिना किसी ठोस वैकल्पिक योजना के पेड़ काट दिए गए, जबकि इन्हें संरक्षित रखते हुए भी काम किया जा सकता था। यात्रियों का आरोप है कि स्टेशन परिसर का दृश्य अब बदसूरत हो चुका है। आधे-अधूरे निर्माण कार्य और पेड़ों की कटाई ने वातावरण को भी प्रभावित किया है। यही नहीं, असुविधा झेल रहे यात्रियों का कहना है कि रेलवे प्रबंधन ने विकास की बजाय बदइंतजामी और अव्यवस्था ही परोसी है।रेलवे अधिकारियों का तर्क है कि तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से काम रुका हुआ है और जल्द ही दोबारा शुरू किया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा किया गया था, तो आधे रास्ते में प्रोजेक्ट क्यों रोक दिया गया? पेड़ों की अनावश्यक कटाई क्यों की गई? और यात्रियों की सुविधाओं का ध्यान क्यों नहीं रखा गया? फिलहाल अधूरे प्रोजेक्ट और उजड़े पेड़ों की यह तस्वीर रेलवे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यात्रियों और पर्यावरण प्रेमियों का गुस्सा इस बात पर है कि रेलवे ने न तो वादे निभाए और न ही जिम्मेदारी। अब देखना होगा कि यह अधूरा सपना कब हकीकत में बदलता है या फिर बिलासपुर स्टेशन पर अव्यवस्था और बदइंतजामी का सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा।

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