प्रकृति और संस्कृति का संगम है जशपुर : मुख्यमंत्री6 से 9 नवंबर तक होगा जशपुर जम्बूरी, पर्यटन और कृषि को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जशपुर जिले के बगिया स्थित कैम्प कार्यालय से जशपुर पर्यटन एवं कृषि क्रांति का शुभारंभ किया। इस मौके पर जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में नागरिकों की मौजूदगी रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम है और यहां पर्यटन के साथ कृषि भी आत्मनिर्भरता की दिशा में नए आयाम गढ़ रही है।मुख्यमंत्री ने जशपुर जम्बूरी को जिले की नई पहचान बताया।

उन्होंने कहा कि 2024 में पहली बार आयोजित हुए इस आयोजन ने पर्यटन, ईको-टूरिज्म और जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। इस बार दूसरा जशपुर जम्बूरी 6 से 9 नवंबर तक आयोजित होगा, जिसमें देश-विदेश के पर्यटक हिस्सा लेंगे। चार दिनों तक रोमांचक खेल, सांस्कृतिक संध्या, लोक नृत्य, शिल्प और व्यंजन महोत्सव से लोगों को नया अनुभव मिलेगा।मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वदेश दर्शन योजना के तहत मयाली नेचर कैंप में बोटिंग, कैक्टस गार्डन और टेंट सुविधाएँ जोड़ी गई हैं। मधेश्वर पहाड़ स्थित विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है, जिससे जशपुर धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।

राज्य सरकार पर्यटन को उद्योग का रूप देने की दिशा में काम कर रही है और होमस्टे नीति से स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिलेंगे।मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर जम्बूरी सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम है। इससे स्व-सहायता समूहों, गाइड्स और शिल्पकारों को सीधा लाभ होगा। उन्होंने घोषणा की कि इस महोत्सव को वार्षिक स्वरूप देकर इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया जाएगा। डिजिटल मार्केटिंग और GIS मैपिंग से जशपुर की पहुँच और बढ़ेगी।

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