
बिलासपुर। शहर में कई प्राचीन मंदिर हैं जिनकी अपनी अलग पहचान और मान्यता है। ऐसा ही एक ऐतिहासिक मंदिर ज्वाली नाला के पास स्थित शीतला मंदिर है, जिसे दुर्गा, काली और सरस्वती मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर करीब 100 साल पुराना है। इसकी नींव स्वर्गीय लक्ष्मी प्रसाद बाजपेई ने रखी थी, जिसके बाद उनके पुत्र पंडित संतोष कुमार बाजपेई पिछले कई वर्षों से मंदिर की देखरेख कर रहे हैं। बताया जाता है कि शुरूआत में शीतला माता विशाल नीम के पेड़ के नीचे विराजमान थीं।

भक्तों की आस्था और बढ़ती श्रद्धा को देखते हुए करीब 55 साल पहले यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। इसके साथ ही मंदिर परिसर में मां दुर्गा, काली और सरस्वती की स्थापना भी की गई। आज यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। मंदिर की एक खास परंपरा यह है कि यहां साल भर हर गुरुवार को भव्य भंडारे का आयोजन किया जाता है। इसके लिए किसी त्योहार का इंतजार नहीं किया जाता। हर गुरुवार बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। यही वजह है कि मंदिर हमेशा भक्तों की भीड़ से गुलजार रहता है। नवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। पिछले 50 वर्षों से मंदिर में नवरात्रि पर माता की स्थापना कर पूजा-अर्चना की जाती है। इस बार भी नवमी के दिन हवन-पूजन के साथ कन्या भोजन का आयोजन होगा। स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि माता रानी यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी करती हैं।


