
बिलासपुर। नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसी अवसर पर बिलासपुर शहर के कोतवाली थाना के पास स्थित प्राचीन काली मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। हालांकि शहर में तिफरा काली मंदिर काफी प्रसिद्ध है। करीब 100 वर्ष पुराने इस मंदिर की सेवा वर्तमान पुजारी आकाश अग्निहोत्री द्वारा की जाती है, जिन्होंने बताया कि वह इस मंदिर के छठवें पीढ़ी के पुजारी हैं। उन्होंने कहा कि यहां विराजमान मां काली सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। दूर-दूर से भक्त यहां दर्शन व आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं और मां के चरणों में अपनी समस्याओं का समाधान खोजते हैं। मंदिर की विशेषता यह है कि परिसर के अंदर ही पीपल, नीम और बरगद का वृक्ष एक साथ स्थित है, जिसे पवित्र त्रिवेणी माना जाता है। भक्तजन इन वृक्षों पर मनोकामना नारियल बांधते हैं, और ऐसा विश्वास है कि शीघ्र ही उनकी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। इसी आस्था के चलते यहां नवरात्रि के दिनों में भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। सप्तमी के अवसर पर विशेष रूप से माता कालरात्रि के स्वरूप की पूजा की जाती है, जहां भक्त दीप, धूप और नैवेद्य अर्पित कर शक्ति की आराधना करते हैं। परंपरा और आस्था का संगम बने इस काली मंदिर की पहचान धीरे-धीरे फिर से लोगों तक पहुंच रही है।


