
बिलासपुर जिले में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। तोरवा थाना क्षेत्र के बंधवापारा तालाब में एक्सीडेंट के बहाने कार चालकों और मजदूरों के बीच हुआ विवाद खतरनाक रूप ले लिया। कार चालकों ने रंगदारी दिखाते हुए अपने साथियों के साथ मिलकर तीन मजदूरों को लहूलुहान कर दिया।हालांकि बीच बचाव में मजदूरों ने भी दो को जमकर पीटा।पुलिस दोनों पक्षों की शिकायत पर मामले की जांच कर रही है। जानकारी के मुताबिक, हेमु नगर क्षेत्र से कारपेंटर का काम करने करगी रोड मझगांव से आए ग्रामीण मजदूर नरेंद्र पात्रे, धनराज पात्रे और खिलेश पात्रे काम खत्म कर लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी गाड़ी को कार चालकों ने पीछे से ठोकर मार दी। मामूली टक्कर को लेकर शुरू हुई बहस जल्द ही झगड़े में बदल गई। कार चालकों ने गाली-गलौज करते हुए मजदूरों पर दबदबा बनाने की कोशिश की।झगड़ा यहीं नहीं रुका। कार चालक अपने रसूख का दिखावा करते हुए फोन पर 8 से 10 और लोगों को मौके पर बुला लाए। इसके बाद मजदूरों पर पत्थरों, डंडों और लात-घूंसों से बेरहमी से हमला कर दिया गया। पिता और दोनों बेटों को इस कदर पीटा गया कि वे खून से लथपथ होकर सड़क पर गिर पड़े। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और हालात को संभालने की कोशिश की।हमले में घायल तीनों मजदूरों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार किया गया। गंभीर चोटों के बावजूद मजदूरों ने हिम्मत दिखाते हुए इलाज के बाद सीधे थाने पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। परिजनों ने आरोप लगाया कि कार चालक और उनके साथी जान से मारने की नीयत से हमला कर रहे थे।

मजदूरों के सिर, चेहरे और शरीर पर गहरी चोटें आई हैं। वहीं, कार चालक पक्ष के गोविंद रजक और असीम साह अस्पताल में भर्ती हैं। उनका कहना है कि झगड़े में उन्हें भी चोट लगी है और वे मजदूरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे। इस घटना में दोनों ही पक्ष पुलिस तक पहुंचे हैं, लेकिन मजदूरों का पक्ष अधिक गंभीर रूप से घायल दिख रहा है। त्योहार सीजन में जब पुलिस सुरक्षा का आश्वासन देती है और आमजनों को सुरक्षित माहौल का भरोसा दिलाया जाता है, उसी वक्त शहर के बीचोंबीच ऐसी खौफनाक घटना होना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है। बंधवापारा तालाब और महापौर के घर के पास हुई यह घटना दिखाती है कि दबंगों को पुलिस का कोई खौफ नहीं है और आम लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।फिलहाल पुलिस ने दोनों पक्षों से शिकायत लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।लेकिन इस घटना ने त्योहारों के मौसम में सुरक्षा व्यवस्था की असलियत सामने ला दी है।यह कहना गलत नही कि यदि पुलिस की गश्त और निगरानी समय पर सक्रिय होती, तो मजदूरों को इस तरह बेरहमी से पीटने की नौबत नहीं आती।


