
बिलासपुर के प्राचीन महामाया मंदिर में नवमी पर्व पर माता रानी का विशेष श्रृंगार किया गया। श्रद्धालुओं ने सुबह से ही मंदिर पहुंचकर देवी के दर्शन किए और मां की कृपा के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर मंदिर परिसर में धार्मिक उल्लास और भक्ति का वातावरण छाया रहा। बुधवार को नवमी पर माता रानी का श्रृंगार ‘राशि श्रृंगार’ के रूप में किया गया, जिसमें सोने-चांदी के भारी आभूषणों से देवी को अलंकृत किया गया।

करीब साढ़े चार किलो सोने के आभूषणों से माता रानी को सजाया गया, जिसमें मुकुट, कुंडल, लक्ष्मी हार, मोहरा, रानी माला और गज माला शामिल रहे।सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता मंदिर में लगा रहा। भक्तों ने माता रानी के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर खुद को धन्य महसूस किया। मंदिर ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि नवरात्रि के दौरान विशेष श्रृंगार की परंपरा है और दीपावली पर भी इसी तरह का भव्य आयोजन किया जाता है।पुजारी आनंद मिश्रा और सहयोगी दल ने माता रानी का श्रृंगार संपन्न कराया।

सोलह श्रृंगार परंपरा के तहत देवी को मुकुट, छत्र, कंठहार और रानी हार से सजाया गया। पूरा श्रृंगार इतना भव्य और अलौकिक था कि श्रद्धालुओं को ऐसा महसूस हुआ मानो माता रानी स्वयं प्रकट होकर आशीर्वाद दे रही हों।मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे। करीब पाँच किलो वजन के आभूषणों से माता रानी का श्रृंगार होने पर सुरक्षा गार्ड भी तैनात किए गए।

श्रद्धालुओं ने कहा कि मां का स्वरूप अत्यंत मनमोहक था और उनके दर्शन मात्र से मन को शांति और ऊर्जा मिली। नवमी पर्व के इस पावन अवसर पर मंदिर ट्रस्ट ने समस्त दर्शनार्थियों और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। भक्तों ने मां महामाया से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे दिन मंदिर में भक्ति, आस्था और उत्साह का माहौल बना रहा।
रतनपुर से वासित अली की रिपोर्ट


