
बिलासपुर में दशहरा उत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। शहर के गांधी चौक, नूतन चौक, मुंगेली नाका और बस स्टैंड क्षेत्र में हर साल की तरह इस बार भी रावण बाजार सज गया है। यहां अलग-अलग आकार और डिजाइन के रावण के पुतले बिक रहे हैं, जिनकी कीमत 250 रुपये से लेकर 20,000 रुपये तक है। खास बात यह है कि छोटे बच्चों के लिए भी विशेष प्रकार के रावण बनाए गए हैं, जिन्हें देखने और खरीदने बड़ी संख्या में लोग बाजार पहुंच रहे हैं। कारीगरों ने इस बार मौसम को ध्यान में रखते हुए वाटरप्रूफ प्लास्टिक बोरियों से बने रावण तैयार किए हैं, ताकि बारिश की वजह से पुतले खराब न हों। हर साल दशहरा से पहले गांधी चौक में रावण बाजार की यह परंपरा शहरवासियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन जाती है। हालांकि, रावण बनाने वाले कारीगर महंगाई से परेशान हैं।

उनका कहना है कि कच्चे माल से लेकर बांस तक हर चीज महंगी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद रावण की कीमतों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हो पाई है। ढाई सौ रुपये से ही रावण की कीमत शुरू होती है, और इसमें भी ग्राहक मोलभाव करते हैं। इस वजह से कारीगरों की आजीविका पर असर पड़ रहा है। कारीगरों का कहना है कि यह परंपरागत काम वे पीढ़ियों से करते आ रहे हैं। भले ही मुनाफा कम हो रहा है, लेकिन इस कला और परंपरा को बचाए रखने के लिए वे मजबूरन इस काम को जारी रखते हैं। इधर, खरीदारों की भीड़ धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। दुकानदारों का अनुमान है कि दशहरा के दिन रावण की कीमतों में इजाफा हो सकता है, क्योंकि उसी दिन मांग सबसे ज्यादा रहती है। कुल मिलाकर, बिलासपुर का यह रावण बाजार न केवल परंपरा को जीवित रखता है बल्कि दशहरा उत्सव की धूम को भी और बढ़ा देता है।


