
बिरनपुर हिंसा प्रकरण में सीबीआई की चार्जशीट सामने आने के बाद राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। थानेश्वर साहू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि यह विवाद दो बच्चों के बीच हुए झगड़े से शुरू होकर परिवारों और फिर समुदायों तक पहुंचा, लेकिन भाजपा ने जानबूझकर इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की। उनका कहना है कि सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया है कि कांग्रेस सरकार की कार्रवाई उस समय पूरी तरह सही थी और जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, वही वास्तविक दोषी थे। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि घटना के बाद भाजपा ने राजनीतिक लाभ के लिए झूठे आरोपों का सहारा लिया। आरोप लगाया गया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह तक ने चुनावी सभाओं में इस प्रकरण को धार्मिक और जातीय रूप देकर जनता की भावनाओं को भड़काने की कोशिश की।

कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने मृतक युवक के पिता ईश्वर साहू को टिकट देकर सहानुभूति बटोरने का प्रयास किया, जबकि सीबीआई ने अंजोर यादव को दोषमुक्त माना है। कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को भाजपा की सुनियोजित साजिश करार दिया है। पार्टी का कहना है कि प्रदेश में ध्रुवीकरण फैलाने के उद्देश्य से कांग्रेस पर तुष्टिकरण के झूठे आरोप लगाए गए, जबकि सीबीआई जांच ने पूरी सच्चाई सामने ला दी है। कांग्रेस के मुताबिक तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने मौके पर पहुंचकर हालात को और भड़काया और राजनीतिक माहौल को विषाक्त बनाया। सीबीआई की रिपोर्ट को कांग्रेस ने भाजपा का काला चेहरा उजागर करने वाला दस्तावेज बताया है। पार्टी ने मांग की है कि अब जब आरोप बेबुनियाद साबित हो चुके हैं कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हुआ हमला बताते हुए भाजपा से नैतिक जवाबदेही की मांग उठाई है।




