
सूफ़ी संत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह रहमतुल्लाह अलैह का चार दिवसीय 67वां सालाना उर्स बुधवार से शुरू हुआ।उर्स की शुरुआत दो रोटी कम खाओ, बच्चों को खूब बढ़ाओ के संदेश के साथ हुई, जो समाज में शिक्षा और संस्कार के महत्व को उजागर करता है।

9 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक चलने वाले इस उर्स का आग़ाज़ परंपरा अनुसार सुबह 11 बजे परचम कुशाई के साथ हुआ, जिसमें अध्यक्ष इरशाद अली, सचिव रियाज़ अशरफी, मोहम्मद सिराज और कमेटी मेंबरों ने हिस्सा लिया।दोपहर 3 बजे शाही संदल और चादर निकाली गई, जिसमें मटका पार्टी जमील मैकश नागपुर ने अपना शानदार कलाम पेश किया। यह चादर दादी अम्मा की बारगाह में अदा की गई।

संदल जुलूस में बड़ी संख्या में जायरीन शामिल हुए और पूरे माहौल में सूफियाना रंग घुल गया।शाम 6 बजे बाबा साहब को सलामी दी गई, जिसमें हजारों जायरीनों ने एक साथ हाथ उठाकर देश और प्रदेश में अमन-शांति की दुआ मांगी। इसके बाद रात 9 बजे कारी शब्बीर अहमद अशरफी की सदारत में आल इंडिया नातियां मुशायरा आयोजित हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना रज्जब अली ने तिलावत-ए-कलाम पाक से की।मुशायरे में शायरे इस्लाम मोहम्मद अली फैजी, जैनुल आबेदीन, नदीम रज़ा फैजी और गुलाम नूर मुज्जसम ने अपनी नातों से समां बांध दिया, और जायरीन सुबह तक झूमते रहे।

मुशायरे की नक़ाबत कफिल अंबर अशरफी ने की। उर्स कमेटी के सदस्य मोहम्मद जुबैर ने बताया कि जायरीनों की सुविधा के लिए 24 घंटे शुद्ध शाकाहारी भंडारे का प्रबंध किया गया है, साथ ही सुबह-शाम चाय और नाश्ते की व्यवस्था भी की गई है।


