
रविवार को प्रदेश समेत व्यापम ने बिलासपुर जिले के 54 केंद्रों मे परीक्षा का आयोजन किया। न्यूनतम योग्यता 8वीं पास के मुकाबले वार्ड बॉय वार्ड आया बनने उच्च शिक्षित युवाओं ने भी इस परीक्षा मे हाथ आजमाया। इसे चिकित्सा सेवा का आवश्यक अंग माना जाता है। सरकारी अस्पतालों में वार्ड बॉय वार्ड आया मरीजो की सेवा के लिए तैनात किए जाते हैं। वे चिकित्सा सेवा मे आवश्यक अंग होते है जिसकी मांग निजी अस्पतालों मे निरंतर बनी रहती है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों मे इन गैर तकनीकी पदों को भरने परीक्षा का आयोजन व्यापम ने रविवार को किया। जिले के 54परीक्षा केंद्रों मे पंजीकृत 19298 में से 14196 परीक्षार्थी परीक्षा देने पहुंचे थे। इनके अनुसार प्रश्नों का स्तर आठवीं क्लास से कही ज्यादा का था। हालांकि बहुत से युवा मास्टर डिग्री और डिप्लोमाधारी निकले जिन्हे वार्ड बॉय वार्ड आया परीक्षा के लिए न्यूनतम 8 वीं कक्षा पास का फायदा मिला। उनके मुताबिक गणित के सवाल थोड़े कठिन थे ओवरऑल पेपर अच्छा गया। काफी हद तक उम्मीदवारों का कहना भी उचित है कि कोरोना कल में अतिरिक्त 10 अंक के साथ अगर आठवीं पास को भी मौका दे दिया जाएगा तो फिर पढ़े लिखे लोगों के लिए अफसर और भी कम होंगे वैसे भी वार्ड बॉय के लिए केवल 100 पद निकाले गए हैं और लगभग 50000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं अब ऐसे में निश्चित तौर पर सरकारी नौकरी के लिए मारामारी तो है लेकिन इसमें सरकार को भी नियम तय करने होंगे भले हीविभिन्न कारणों से 5102 उम्मीदवार गैर हाजिर रहे।बेरोजगारी का असर इस परीक्षा पर साफ नजर आया जहां अधिकतम 20 हजार की पगार पर काम करने पढ़े लिखे युवा तैयार दिखे। यह पद वार्डो की सफाई, मरीज को लाने ले जाने हाउस कीपिंग की श्रेणी मे आता है। जिसे निजी अस्पताल प्रबंधन अपने यहां आउट सोर्सिंग से पूरा करते है। प्रदेश मे करीब एक दशक बाद वार्ड बॉय वार्ड आया की भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया।


