
जिले में अब बिलासपुर प्रेस क्लब के किसी भी सदस्य पत्रकार के खिलाफ बिना जांच सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। यह निर्णय एसएसपी रजनेश सिंह द्वारा जारी सर्कुलर के माध्यम से लागू किया गया है। इसके अनुसार, यदि किसी पत्रकार के खिलाफ गंभीर शिकायत आती है तो एफआईआर से पहले डीएसपी स्तर के अधिकारी की अगुवाई में जांच टीम गठित की जाएगी, जिसमें प्रेस क्लब की कार्यकारिणी से नामित एक सदस्य भी शामिल होगा। शिकायत पर कार्रवाई तभी होगी जब जांच में आरोप सही पाए जाएंगे।

यह महत्वपूर्ण निर्णय बिलासपुर प्रेस क्लब के नवनिर्वाचित अध्यक्ष दिलीप यादव के नेतृत्व में कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह से मुलाकात के दौरान लिया गया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पत्रकारों के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें कुछ मामले फर्जी भी पाए गए। इससे मीडिया और पुलिस प्रशासन के बीच अविश्वास गहराने लगा था। आपात बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि बिना जांच किसी पत्रकार के खिलाफ प्रकरण दर्ज नहीं होना चाहिए।

प्रेस क्लब ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई पत्रकार दोषी पाया जाता है, तो न केवल उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए बल्कि प्रेस क्लब भी उसकी सदस्यता समाप्त करेगा। इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए एसएसपी ने तत्काल अपने मातहतों को सर्कुलर जारी करने के निर्देश दिए। हालांकि जांच में शामिल प्रेस क्लब प्रतिनिधि को केवल उपस्थिति का अधिकार होगा, हस्ताक्षर या निर्णय का नहीं।कलेक्टर और एसएसपी से मुलाकात के दौरान पत्रकारों ने हाल ही में प्रेस क्लब सदस्य जिया उल्ला खान पर हुए हमले का भी मुद्दा उठाया।

बताया गया कि समाचार कवरेज के दौरान उन पर फावड़े से जानलेवा हमला किया गया और झूठे केस में फंसाने की धमकी भी दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने वीडियो बनाकर स्वयं को बचाया। पत्रकारों ने मांग की कि हमलावरों पर सख्त कार्रवाई की जाए।कलेक्टर संजय अग्रवाल ने पत्रकारों को आश्वासन दिया कि प्रशासन उनकी सुरक्षा के प्रति संजीदा है। उन्होंने कहा कि यह उनका अपना जिला है और यहां के हालातों को वह अच्छी तरह जानते हैं।

पत्रकार लोकतंत्र के प्रहरी हैं और उन्हें हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।इस प्रतिनिधिमंडल में उपाध्यक्ष गोपीनाथ डे, सचिव संदीप करिहार, कोषाध्यक्ष लोकेश वाघमारे, सहसचिव रमेश राजपूत, वरिष्ठ पत्रकार रवि शुक्ला, अखलाख खान, श्याम पाठक,राकेश परिहार, मनीष शर्मा, उषा सोनी,अमित संतानीय, उत्पल सेन गुप्ता, पंकज गुप्ते, अरविंद मिश्रा, संजीव सिंह, शुभम श्रीवास,आशीष मौर्य, अनुज श्रीवास्तव शेख असलम, जिया उल्लाह खान, घनश्याम गंधर्व, महेंद्र सिंह, मधु खान, भारती यादव, प्रेरणा शर्मा, रमा धीरी,प्रियंका सिंह,नीरज मखीजा आदि सहित दर्जनों पत्रकार उपस्थित रहे। सभी ने इस फैसले को पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।


