
बस्तर में नक्सल उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक सफलता मिली। पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन कार्यक्रम के तहत दंण्डकारण्य क्षेत्र के 210 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे छत्तीसगढ़ और देश के लिए ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि बंदूकें नीचे रखकर संविधान को थामने वालों ने बस्तर के भविष्य में शांति और एकता के बीज बोए हैं।आत्मसमर्पण करने वालों में 1 सेंट्रल कमेटी सदस्य, 4 डीकेएसजेडसी सदस्य, 21 डिविजनल कमेटी सदस्य समेत कई वरिष्ठ माओवादी शामिल हैं।

इन कैडरों ने AK-47, SLR और LMG सहित 153 हथियार पुलिस को सौंपे। मुख्यमंत्री ने कहा यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि आत्मजागरण की यात्रा है। हिंसा नहीं, विश्वास ही परिवर्तन का मार्ग है।मुख्यमंत्री साय ने बताया कि राज्य की नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025 नियद नेल्ला नार योजना और पूना मारगेम जैसी पहल ने बस्तर में विश्वास और विकास का नया अध्याय लिखा है। आत्मसमर्पित कैडरों को पुनर्वास सहायता, आवास, शिक्षा और स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ा जाएगा। कार्यक्रम में डीजीपी अरुण देव गौतम, एडीजी विवेकानंद सिन्हा, आईजी सुंदरराज पी. सहित कई अधिकारी उपस्थित थे।


