
कार्तिक अमावस्या पर रात 12 बजे के बाद आधी रात को विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच तांत्रिक विधान से मां काली की प्रतिमा वेदी पर स्थापित की गई। मंगलवार को सुबह से ही भक्त काली माता का साक्षात दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते रहे।वही स्त्रियां ने परंपरा अनुसार खोइंचा भरकर माता से सुख-समृद्धि की कामना की। कई स्थानों पर भक्त अपनी श्रद्धा स्वरूप माता को बली भी अर्पित की गई। दीपावली की रात्रि जब संसार का हर दीप अंधकार को चुनौती देता है, उसी पावन घड़ी में भागलपुर की धरती पर मां काली के जागरण का महापर्व प्रारंभ हुआ। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक काली पूजा को।लेकर परिसर फूलों और रंग-बिरंगी झालरों से सुसज्जित किया गया था ।तो काली स्थानों पर भव्य पंडालों में देवी स्वरूपा स्थापित की गई।सोमवार की आधी रात को विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच मां काली की प्रतिमा वेदी पर स्थापित की गई। वही मंगलवार को सुबह से ही भक्त माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। विधि विधान और मंत्रोच्चार के बीच काली माता की पूजा अर्चना की गई तो वहीं बिलासपुर में भी पिछले कुछ समय से काली माता के पूजन का प्रचलन बढ़ा है बंगाली समाज के लोगों के द्वारा यहां काली माता की विधि विधान से पूजा अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है क्योंकि दीपावली के मौके पर काली माता की पूजा होती है लिहाजा सभी जगह पर दिन-रात रोशनी की झालर और रंगीन लाइटों से आलोकित है। यहां दूर-दराज से भक्त पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मां की आराधना करने पर मां काली साधक की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इस मंदिर में आज भी तांत्रिक पद्धति से विधिवत पूजा संपन्न होती है, जो इसकी प्राचीन परंपरा को जीवंत बनाए हुए है।


