
बिलासपुर की मस्तुरी में हुए गोलीकांड का पुलिस ने 72 घंटे के भीतर पर्दाफाश कर दिया है। नकाबपोश हमलावरों के इस गैंग पर पुलिस ने ‘प्रहार’ करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वारदात के पीछे की कहानी सुनकर आप दंग रह जाएंगे! पुलिस लाइन स्थित बिलासागुड़ी में मौजूद एसएसपी रजनेश सिंह ने मस्तूरी गोलीकांड के पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मस्तुरी के मेन रोड पर 28 अक्टूबर की शाम गोलियों की गूंज से पूरा इलाका थर्रा उठा था।

नितेश सिंह और उनके साथियों पर मोटरसाइकिल सवार नकाबपोश युवकों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। गोलियों की बौछार में दो लोग घायल हुए, जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन में ए.सी.सी.यू. और थाना मस्तूरी की संयुक्त टीम ने जबरदस्त जांच अभियान चलाया। पुलिस ने इलाके के सौ से अधिक CCTV फुटेज खंगाले और कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए आखिरकार हमलावरों तक पहुंच गई।

गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य साजिशकर्ता विश्वजीत अनंत, उसके भाई अरमान उर्फ बलमजीत, चाहत उर्फ विक्रमजीत, और उनके साथियों मुस्तकीम उर्फ नफीस, मतीन उर्फ मॉन्टू सहित दो नाबालिग शामिल हैं। इन सभी ने रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई में खून-खराबे की यह स्क्रिप्ट रची थी।पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो देसी पिस्टल, एक कट्टा, पांच मैगजीन, चार जिंदा कारतूस, 13 खाली खोखे, 10 बुलेट्स, और पांच मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

इतना ही नहीं, जांच में सामने आया कि हमले के लिए फंडिंग भी हुई थी करीब एक लाख रुपये तारकेश्वर पाटले द्वारा आरोपियों को दिए जाने की बात सामने आई है। आपसी रंजिश, जमीन विवाद और राजनीतिक वर्चस्व की इस खतरनाक लड़ाई ने पूरे मस्तुरी इलाके को दहला दिया। लेकिन बिलासपुर पुलिस की तेज़ कार्रवाई ने नकाबपोश हमलावरों के इस गैंग को बेनकाब कर दिया है। अब पुलिस बाकी आरोपियों की तलाश और फंडिंग नेटवर्क की तहकीकात में जुटी है।


