
बिलासपुर रेल हादसे में जहाँ रेलवे प्रशासन के रेस्क्यू पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं स्थानीय लोगों ने इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल पेश की। हादसे के तुरंत बाद सबसे पहले मौके पर पहुंचे आसपास के दुकानदार और ग्रामीणों ने बिना किसी सरकारी मदद के राहत कार्य शुरू किया।जानकारी देते हुए असगर खान ने बताया कि चेंबर में फंसे एक बच्चे को लोहे की रॉड काटकर सुरक्षित बाहर निकालने का साहसिक काम रेलवे नहीं, बल्कि इन्हीं ग्रामीणों ने किया।

अंधेरे में टॉर्च, तार और मोबाइल की रोशनी से रास्ता बनाते हुए अजगर खान और उनके भाइयों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर लगातार राहत अभियान जारी रखा। उनका कहना था।जब तक आखिरी घायल बाहर नहीं निकलेगा,हम यहीं रहेंगे।यह दृश्य बता रहा था कि हादसे के मलबे में सिर्फ पीड़ा नहीं, बल्कि मानवता की सबसे चमकदार किरण भी दिखी जब सिस्टम चुप था, तब जनता ही बन गई असली रेस्क्यू टीम।


