
रेलवे सेफ्टी आयुक्त बी.के. मिश्रा की अगुवाई में टीम लगातार हादसे के कारणों की तह तक पहुँचने में जुटी है। पहले दिन जहाँ घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए गए थे, वहीं दूसरे दिन से अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ का सिलसिला शुरू हुआ। चार नवंबर की शाम को बिलासपुर के लालखदान और गेवरारोड स्टेशन के बीच हुए इस हादसे ने पूरे रेलवे तंत्र को हिला दिया था। मेमू लोकल ट्रेन और खड़ी मालगाड़ी की टक्कर में 11 लोगों की मौत और 20 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद जांच के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की ओर से सभी जरूरी दस्तावेज, सिग्नल रिकॉर्ड, ट्रैक डेटा और लोको लॉग बुक जांच टीम को सौंप दिए गए हैं। जांच के पहले दिन रेलवे सेफ्टी आयुक्त ने मौके का मुआयना कर सिग्नल सिस्टम, ट्रैक की स्थिति और संचार व्यवस्था की बारीकी से जांच की। टीम ने ड्राइवर और गार्ड के केबिन के अवशेषों से तकनीकी साक्ष्य जुटाए। दूसरे दिन पूछताछ का दौर चला, लेकिन दिनभर चली प्रक्रिया में 12 घंटे में सिर्फ़ 27 में से 7 लोगों के बयान ही दर्ज हो पाए। जांच का तीसरा और अंतिम दिन रेलवे सेफ्टी आयुक्त की टीम एक-एक कर सभी संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और तकनीकी स्टाफ से पूछताछ कर रही है।इस जांच रिपोर्ट के आधार पर हादसे के असली कारणों का खुलासा किया जाएगा। टीम ने अब तक सिग्नलिंग और कम्युनिकेशन सिस्टम की तकनीकी गड़बड़ियों पर विशेष ध्यान दिया है। हादसे के वक्त किस ट्रैक पर कौन-सा सिग्नल एक्टिव था, कौन-से कंट्रोल रूम ने किसे मैसेज भेजा, इन सभी सवालों के जवाब जांच में ढूंढे जा रहे हैं।हादसे की जांच पूरी होने के बाद रेलवे सेफ्टी आयुक्त अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जल्द ही रेलवे बोर्ड को सौंपेंगे। रिपोर्ट में यह साफ़ किया जाएगा कि गलती सिग्नल सिस्टम की थी, मानव त्रुटि थी या किसी तकनीकी खामी की वजह से यह हादसा हुआ। तीसरे दिन की जांच के बाद अब उम्मीद है कि इस भयावह हादसे की सच्चाई सामने आएगी। 11 ज़िंदगियों की कीमत पर हुई इस गलती से सबक लेकर रेल प्रशासन भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगा।


