
जांजगीर-चांपा में जिला जेल और अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। ठगी के गंभीर मामलों में विचाराधीन बंदी पंचराम निषाद अस्पताल से हथकड़ी तोड़कर फरार हो गया। इस घटना के बाद पुलिस और जेल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है, जबकि फरार कैदी का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। घटना की जिम्मेदारी तय करते हुए जेल प्रहरी को बर्खास्त कर दिया गया है। दरअसल, धोखाधड़ी के कई मामलों में आरोपी पंचराम निषाद उर्फ पंचू, पिता गणेशराम निषाद उम्र 37 वर्ष, निवासी चंदेली थाना चंद्रपुर, जिला महासमुंद वर्तमान में सरायपाली में रह रहा था। उसे नवागढ़ पुलिस ने गिरफ्तार कर जिला जेल खोखरा भांठा जांजगीर में न्यायिक हिरासत में भेजा था।

बीते 8 नवंबर को उसे बीमारी की शिकायत पर जिला अस्पताल जांजगीर में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। लेकिन उपचार के दौरान प्रहरी की लापरवाही से वह अस्पताल के बंदी वार्ड से हथकड़ी निकालकर फरार हो गया।घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल चौकी पुलिस सक्रिय हुई और पूरे अस्पताल परिसर में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। बावजूद इसके, बंदी का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। बताया जा रहा है कि फरार होने के समय अस्पताल के बंदी वार्ड में केवल एक प्रहरी भुनेश्वर सिंह पैकरा ड्यूटी पर था। वह दवा लेने मेडिकल स्टोर गया था, तभी बंदी मौका पाकर भाग निकला।

इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए जेल प्रहरी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।सिविल सर्जन एस. कुजूर ने बताया कि बंदी पंचराम निषाद को कल डायरिया और बुखार की शिकायत पर भर्ती किया गया था। डॉक्टर द्वारा दवा लिखे जाने के बाद प्रहरी दवाई लेने बाहर गया था। इसी बीच, बंदी हथकड़ी से हाथ निकालकर फरार हो गया। प्रहरी के लौटने पर जब उसने बंदी को गायब पाया, तो तत्काल घटना की सूचना चौकी पुलिस को दी। वहीं जेलर डीडी टोंडे ने बताया कि आरोपी को पहले हाथ में फ्रैक्चर की शिकायत थी, जिसके इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था। लेकिन प्रहरी की ग़ैरज़िम्मेदारी से वह फरार हो गया। उन्होंने बताया कि घटना के बाद तुरंत कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई और फरार बंदी की तलाश शुरू कर दी गई है।

जानकारी के मुताबिक, फरार बंदी पंचराम निषाद राज्य के कई जिलों में छड़, गिट्टी और सीमेंट व्यापारी बनकर लोगों से लाखों की ठगी कर चुका है। वह सस्ते निर्माण सामग्री देने का झांसा देकर रकम ऐंठता था। 28 अक्टूबर को उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था, और 7 नवंबर को हाथ में चोट लगने पर अस्पताल लाया गया। अब उसका एक बार फिर फरार होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पंचराम निषाद की तलाश में पुलिस की कई टीमें लगी हुई हैं, लेकिन अब तक उसका कोई पता नहीं चल सका है। वहीं जेल और अस्पताल प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ रहे हैं। जिले में सुरक्षा इंतज़ाम और प्रहरी प्रणाली की कमजोरी इस घटना से एक बार फिर उजागर हो गई है।यह घटना न केवल जेल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल उठाती है कि आखिर विचाराधीन बंदियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा।


