
बिलासपुर का अचानकमार टाइगर रिजर्व एक बार फिर पर्यटकों से गुलजार हो गया है। घने जंगल, हरियाली, पहाड़ों की खूबसूरती और वन्यजीवों की झलक अब देश ही नहीं, विदेशों से आए मेहमानों को भी अपनी ओर खींच रही है। वन विभाग की नई पहल और सफारी सुविधाओं में सुधार के बाद यहां रोजाना बड़ी संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं।हाल ही में भूटान से आए स्कूली बच्चों का एक दल अचानकमार पहुंचा। बच्चों ने यहां के प्राकृतिक वातावरण, स्वच्छ हवा और शांत माहौल की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भूटान को भले ही दुनिया का सबसे खुशहाल देश माना जाता है, लेकिन अचानकमार की हरियाली और नेचर ने उन्हें अपने देश से भी ज्यादा सुकून दिया।वन विभाग ने बच्चों को जंगल के बारे में करीब से जानने का अनुभव देने के लिए एक किलोमीटर लंबा पैदल ट्रैक कराया। इस दौरान बच्चों ने बाइसन, हिरण, चीतल और पक्षियों की कई प्रजातियां देखीं। सभी ने कहा कि यह ट्रैक न सिर्फ एडवेंचर से भरा था बल्कि प्रकृति के प्रति जागरूकता भी बढ़ाने वाला रहा।पर्यटकों ने बताया कि अचानकमार का वातावरण लगभग प्रदूषण मुक्त है और यहां की सफाई व नेचर के साथ तालमेल अद्भुत है।

बच्चों ने यहां के वन्यजीवों को देखकर उत्साह व्यक्त किया और कहा कि अगर ऐसी जगहों को और विकसित किया जाए तो ये विश्व स्तर पर पर्यटकों को आकर्षित कर सकती हैं।वन विशेषज्ञों का कहना है कि अचानकमार जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन के लिहाज से छत्तीसगढ़ का अनमोल धरोहर है। यह क्षेत्र बाघ, तेंदुआ, बाइसन और दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियों से समृद्ध है। अगर पर्यटन सुविधाओं को और बेहतर किया जाए तो यह न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है वन विभाग ने भी पर्यटकों की सुविधा के लिए पूरी तैयारी कर ली है।सफारी के लिए जिप्सी और यौद्धा वाहन उपलब्ध कराए गए हैं,जिनकी ऑनलाइन बुकिंग की जा सकती है।रिजर्व के अंदर बैगा रिसॉर्ट को भी नया रूप दिया गया है ताकि आने वाले सैलानियों को ठहरने की बेहतरीन सुविधा मिले।कुल मिलाकर, अचानकमार अब सिर्फ छत्तीसगढ़ का नहीं बल्कि देश-विदेश के पर्यटकों का आकर्षण बन चुका है।प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर के शौकीनों के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं।आने वाले दिनों में अगर वन विभाग और आधुनिक सुविधाओं को जोड़े, तो अचानकमार टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ की पर्यटन पहचान बन सकता है।


