
महमंद ग्राम पंचायत के बेलभाठा तालाब में छुट्टी का दिन एक भयावह हादसे में बदल गया। नहाने पहुंचे चार नाबालिग गहरे गड्ढे में फंस गए। दो बच्चों को ग्रामीणों ने बचा लिया, लेकिन दो किशोर अब भी लापता हैं।अवैध खुदाई से लेकर SDRF की लेटलतीफी तक कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं रेस्क्यू टीम ने देर शाम तक खोजबीन जारी रखी, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला। सुबह लगभग 11 बजे शिव विहार और अन्नपूर्णा कॉलोनी गणेश नगर के चार नाबालिग—प्रियांशु सिंह, एम. उदयन, पी. साईं राव और टी. पवन—नहाने के लिए बेलभाठा तालाब पहुंचे थे।

पानी में उतरते ही सभी का पैर अचानक एक बेहद गहरे गड्ढे में फंस गया। तेज गहराई ने उन्हें बाहर निकलने का मौका ही नहीं दिया।ग्रामीण तुरंत दौड़े और प्रियांशु और उदयन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन साईं राव और पवन पानी में लापता हो गए, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले पंचायत कार्यकाल में रसूखदारों ने जेसीबी और मशीनों से अवैध खुदाई करवाई, जिससे तालाब का एक हिस्सा असामान्य रूप से बेहद गहरा हो गया। आज वही अवैध गहराई इन नाबालिगों के डूबने का कारण बनी है।

ग्रामीणों का कहना है कि तालाब कभी ऐसा नहीं था, यह गड्ढा मशीनों से की गई खुदाई का परिणाम है। हादसे के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। सरपंच प्रतिनिधि विक्की निर्मलकर ने पूर्व जनप्रतिनिधियों अनिल कैवट और नागेंद्र राय पर आरोप लगाया कि अवैध खुदाई उन्हीं के संरक्षण में हुई और आज की घटना उसी लापरवाही का नतीजा है। वहीं पूर्व प्रतिनिधियों ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। तोरवा पुलिस और ग्रामीणों ने तो तुरंत ही रस्सियों, नावों और मशालों के सहारे रेस्क्यू शुरू कर दिया था।

लेकिन शिकायत है कि SDRF को सूचना समय रहते दे दी गई थी, फिर भी टीम मौके पर काफी देर से पहुंची। परिजनों का आरोप है कि अगर SDRF समय पर पहुंच जाती, तो शायद बच्चों की जान बच सकती थी। शाम करीब 4 बजे SDRF की टीम तालाब पहुंची और गोताखोरों के साथ तलाशी अभियान तेज किया। गहराई ज्यादा होने से खोज में दिक्कतें आने लगीं। ग्रामीणों ने मांग की कि ऑक्सीजन सिलेंडर लगाकर अंदर उतारा जाए, जिसके बाद SDRF टीम सिलेंडर के साथ तालाब की गहराई में उतरी।

इसके बावजूद शाम ढलने तक साईं राव और पवन का कोई सुराग नहीं मिला। अंधेरा बढ़ने के बावजूद टीम ने लाइटों की मदद से देर शाम तक खोजबीन जारी रखी, लेकिन नतीजा शून्य रहा। अब उम्मीद है कि रात में पानी की स्थिति बदलने पर या सुबह होने के बाद रेस्क्यू टीम को कुछ सफलता मिल सके।

फिलहाल बेलभाठा तालाब हादसा केवल एक दुखद घटना नहीं, बल्कि अवैध खुदाई, खराब निगरानी और रेस्क्यू एजेंसियों की सुस्ती का बड़ा संकेत है।फिलहाल तोरवा पुलिस और SDRF टीम खोज अभियान में जुटी है और पूरा इलाका इस उम्मीद में है कि दोनों किशोर जल्द मिल सकें।


