
छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा रविवार को प्रदेश के 16 जिलों में आयोजित आमिन/पटवारी भर्ती परीक्षा सुर्खियों में रही। बिलासपुर में परीक्षा के लिए कुल 126 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। सुबह निर्धारित समय पर परीक्षा शुरू हुई, लेकिन केंद्रों के बाहर बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों की भीड़ देखी गई, जिनमें कई समय पर न पहुंच पाने के कारण परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। बताया गया कि कई परीक्षार्थी दूर-दराज़ के इलाकों जैसे बलौदाबाजार, लोरमी, सरगांव और मुंगेली—से परीक्षा देने बिलासपुर पहुंचे थे। इनमें से कई को कुछ ही मिनट देर से पहुंचने पर एंट्री नहीं दी गई। परीक्षा केंद्रों के बाहर 10–15 की संख्या में विद्यार्थी उदास बैठे नजर आए। उन्होंने बताया कि महीनों की तैयारी केवल कुछ मिनट की देरी के कारण बेकार हो गई। परीक्षार्थियों का कहना था कि वे अलग-अलग शहरों से लंबी दूरी तय करके आए थे और ट्रैफिक व स्थानीय परिवहन की दिक्कतों की वजह से देर हो गई।

उनके अनुसार, 2–5 मिनट की देरी को मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए था। कई विद्यार्थियों ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि सिर्फ कुछ मिनट की वजह से उन्हें परीक्षा से बाहर रखना अनुचित है। हालांकि, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्थाओं से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा के नियम पहले ही स्पष्ट कर दिए गए थे और रिपोर्टिंग टाइम का पालन अनिवार्य था। समय होने के बाद गेट बंद करना सुरक्षा और परीक्षा पारदर्शिता के लिए जरूरी प्रक्रिया है। यदि अपवाद बनाए जाएं तो परीक्षा की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है। इस घटना से यह संदेश जरूर सामने आया कि परीक्षाओं में समय का पालन बेहद महत्वपूर्ण है। देर से पहुंचने वाले कई परीक्षार्थियों ने इसे अपनी गलती भी माना और कहा कि भविष्य में वे ऐसी लापरवाही नहीं करेंगे। वहीं दूसरी ओर, परीक्षार्थियों की मांग है कि प्रणाली में इतना लचीलापन होना चाहिए कि मामूली देरी को ध्यान में रखते हुए योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके।




