
सीटेट परीक्षा को लेकर एक बेहद संवेदनशील और गंभीर तस्वीर सामने आई है। रेलवे स्टेशन परिसर स्थित दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे हायर सेकेंडरी स्कूल नंबर–1 में आयोजित सीटेट परीक्षा के दौरान हुई कथित लापरवाही ने दूर-दराज से आए सैकड़ों अभ्यर्थियों को मानसिक तनाव में डाल दिया है और उनके भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह पूरा मामला बिलासपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित रेलवे स्कूल नंबर–1 परीक्षा केंद्र का है, जहां परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थियों ने अव्यवस्थित परीक्षा प्रक्रिया का आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि करीब 250 से 300 परीक्षार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं कराया गया, जबकि यह परीक्षा की अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा है।अभ्यर्थियों ने बताया कि वे छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से एक दिन पहले ही बिलासपुर पहुंच गए थे, ताकि किसी भी तरह की तकनीकी या प्रक्रिया संबंधी चूक से बचा जा सके। इसके बावजूद परीक्षा केंद्र के केंद्राध्यक्ष द्वारा गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसका खामियाजा अब छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।छात्रों का कहना है कि एडमिट कार्ड में स्पष्ट निर्देश हैं कि बिना बायोमेट्रिक सत्यापन के उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद बायोमेट्रिक मशीन खराब होने की जानकारी रहते हुए भी उन्हें परीक्षा कक्ष में बैठा दिया गया और बाद में प्रक्रिया पूरी कराने का आश्वासन देकर परीक्षा कराई गई।

कुछ परीक्षार्थियों ने यह भी बताया कि जिनका परीक्षा केंद्र पहले कहीं और था, वहां नियमों का पूरी तरह पालन किया गया और बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही उन्हें परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि यही प्रक्रिया रेलवे स्कूल नंबर–1 में भी अपनाई जानी थी, जो नहीं की गई।परीक्षा समाप्त होने के बाद जब अभ्यर्थियों ने केंद्र अधीक्षक और स्टाफ से लिखित आश्वासन मांगा कि उनका पेपर जांचा जाएगा, तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। सिटी कोऑर्डिनेटर से संपर्क के लिए दिया गया नंबर भी बंद या ब्लॉक बताया जा रहा है, जिससे छात्रों की चिंता और बढ़ गई। नाराज अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्र परिसर में धरना देकर अपनी पीड़ा जाहिर की। उनकी मांग साफ है—उन्हें लिखित रूप में भरोसा दिया जाए कि इस लापरवाही का असर उनके परिणाम पर नहीं पड़ेगा। फिलहाल शिक्षा विभाग या केंद्र प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब सवाल यही है कि सीटेट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में हुई इस चूक की जिम्मेदारी कौन लेगा और क्या सैकड़ों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित रह पाएगा।




