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बिलासपुर में परीक्षा के बीच नाबालिगों की रफ्तार पर सवाल सख्ती की जगह अपील तक सीमित प्रशासन, जिम्मेदारी तय करने की मांग

जिले में बोर्ड परीक्षाओं के दौरान नाबालिग छात्रों द्वारा दोपहिया वाहन चलाने के बढ़ते मामलों ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर यातायात अभियान तो जारी है, लेकिन जमीनी स्तर पर नाबालिगों की लापरवाही थमती नजर नहीं आ रही है। गौरतलब हो कि बिलासपुर ट्रेफिक पुलिस की निगरानी में सामने आया है कि कई दसवीं-बारहवीं के विद्यार्थी बिना अनुमति और बिना लाइसेंस बाइक-स्कूटी चलाकर परीक्षा केंद्र पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं, अधिकांश मामलों में हेलमेट और अन्य सुरक्षा नियमों की खुली अनदेखी करते हुए बेतरतीब और तेज रफ्तार में वाहन चलाए जा रहे हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है।ट्रैफिक एडिशनल एसपी रामगोपाल करियारे को लगातार मिल रही सूचनाओं में यह सामने आया है कि अभिभावकों की लापरवाही के कारण नाबालिग सड़कों पर फर्राटे भर रहे हैं। इसे साफ तौर पर देखरेख के अभाव का मामला माना जा रहा है, जो किसी बड़े हादसे को न्यौता दे सकता है।

हालांकि अधिकारियों द्वारा अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन से अपील जरूर की जा रही है कि नाबालिगों को वाहन न दें, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि जानकारी और संज्ञान में आने के बाद भी सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यदि समय रहते कठोर कदम उठाए जाते तो यह लापरवाही रोकने में प्रभावी साबित हो सकती थी।स्थिति को लेकर अब जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अपील से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि स्कूल प्रबंधन, अभिभावकों और प्रशासन तीनों को मिलकर जवाबदेही तय करनी होगी ताकि यह संदेश साफ जाए कि नियमों से समझौता नहीं होगा। पुलिस ने फिर से अभिभावकों से बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और परीक्षा अवधि में संयम बरतने की अपील की है। साथ ही चेताया गया है कि यदि लापरवाही जारी रही तो भविष्य में कड़ी कार्रवाई से भी इंकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह केवल नियमों का नहीं बल्कि बच्चों की जान का सवाल है।

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