Homeहमर बिलासपुरजलेबी से आकार मे ज्यादा बड़ा होता और स्वाद मे लाजवाब, अनोखी...

जलेबी से आकार मे ज्यादा बड़ा होता और स्वाद मे लाजवाब, अनोखी मिठाई का कद्रदान पूरा शहर,होली में लगती है खास मिठाई

सिंधी संस्कृति मे व्यंजनो का अहम स्थान है जिसके बिना परम्परा का जिक्र करना मुश्किल है। बंटवारे के बावजूद यह समाज अपनी जड़ो से आज भी बँधा हुआ है। जिसका उदाहरण हर साल होली पर मिलता है। घेवर के आकार की जलेबी जिसे सिंधी समाज मे गिहर कहा जाता है इसका अद्भुत स्वाद केवल होली पर ही चखने मिलता है। बिलासपुर वासी बीते सालों में सिंधी मिष्ठान गीहर से परिचित हो चुके है। यह दिखने में जलेबी से आकार मे ज्यादा बड़ा होता और स्वाद मे लाजवाब है। मिठाइयाँ बेचने वाले सिंधी समाज के गिने चुने लोग इस परम्परा को आज भी सहेजे हुए है।केवल होली पर मिलने वाली इस अनोखी मिठाई का कद्रदान पूरा शहर हो चला है।बिलासपुर मे चुनिंदा स्थानों मे इसे तैयार किया जाता है. इसकी खुशबु से सिंधी परिवारों को होली के आगमन का पता लगता है. सिंधी कालोनी मे घनश्याम हिंदुजा कई पीढ़ियों से यह मिष्ठान बना रहे है।

त्यौहार पर घर आने वाले मेहमानों को गुजिया, नमकीन के साथ गिहर परोसा जाता है. अन्य समाज के लोग भी स्वाद चखने के बाद इसके मुरीद हो गए है। सिंधी समाज में गीयर परंपरा का हिस्सा है. पाकिस्तान के सिंध में गीहर एक परम्परागत मिठाई हुआ करता था.खास होली पर इसे बनाया जाता है। भारत विभाजन के बाद सिंधी समाज अपनी संस्कृति को साथ लाए. इनमें सिंधी व्यंजन प्रमुख स्थान रखते भी है. पूरे देश मे बसा सिंधी समाज छत्तीसगढ़ मे भी अपने परंपरागत व्यंजन और मिष्ठान के लिए अलग पहचान रखता है. बिलासपुर के चकरभाठा के अलावा बिलासपुर शहर मे कई स्थानों पर सजने वाली अस्थायी दुकानों पर गीहर के अलावा गुजिया और मीठा समोसा लोगो मे आकर्षण पैदा करता है। इसके बिना सिंधी समाज की होली फीकी है। स्वाद ज़ब परम्परा बन जाये तो यह जुबान पर चढ़ जाती है। होली पर यह अनोखे स्वाद वाला मिष्ठान खाकर इसकी याद आपको साल भर रहेगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments