
बिलासपुर। समाज की पारंपरिक मान्यताओं से अलग एक भावुक कर देने वाला दृश्य उस समय देखने को मिला। जब एक बेटी ने अपनी मां को अंतिम विदाई देने की जिम्मेदारी खुद उठाई। आमतौर पर अंतिम संस्कार की रस्में बेटों द्वारा निभाई जाती हैं लेकिन यहां बेटी ने परंपरा को तोड़ते हुए अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया और पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया। जानकारी के अनुसार ग्राम परसाही निवासी भूरी बाई चौहान पति बलदेव सिंह चौहान का निधन हो गया। उनके परिवार में दो बेटियां ही हैं। मां के निधन के बाद जहां परिवार शोक में डूबा था वहीं घर में बेटा नहीं होने के कारण अंतिम संस्कार को लेकर चिंता भी थी। ऐसे समय में बड़ी बेटी ने साहस दिखाते हुए मां के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली और छोटी बहन के साथ मिलकर सभी धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार की तैयारी की। दोनों बेटियों ने नम आंखों से अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया और श्मशान घाट तक ले गईं। वहां बड़ी बेटी ने पूरे विधि-विधान के साथ अपनी मां को मुखाग्नि दी। इस दौरान उपस्थित लोगों की आंखें भी नम हो गईं और माहौल बेहद भावुक हो गया। बेटी के इस साहसिक कदम की लोगों ने सराहना की।परिवार के परिचितों का कहना है कि भूरी बाई चौहान ने अपनी दोनों बेटियों को हमेशा बेटों की तरह पाला और उन्हें मजबूत बनने की सीख दी थी। शायद उन्हीं संस्कारों का परिणाम था कि इस कठिन घड़ी में बेटियां मजबूती से आगे आईं। इस घटना ने समाज को यह संदेश दिया है कि बेटियां भी हर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं और सच्चा प्रेम व कर्तव्य किसी भी परंपरा से बड़ा होता है।




