
बिलासपुर में जमीन घोटाले का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 1928 के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज एक व्यक्ति को कागजों में “जिंदा” कर 2023 में 46 साल का दिखाया गया और उसी के नाम पर जमीन का नामांतरण कर दिया गया। इस फर्जीवाड़े के जरिए जमीन को आगे बेच भी दिया गया, जिससे पूरे मामले में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।मामला सिरगिट्टी क्षेत्र का है, जहां कौशल प्रसाद ब्राह्मण के नाम दर्ज जमीन को वर्षों बाद “कौशल प्रसाद सूर्यवंशी” के नाम पर ट्रांसफर कर दिया गया। आरोप है कि पहले फर्जी व्यक्ति खड़ा किया गया, फिर उसके नाम पर दस्तावेज तैयार कर फौती नामांतरण कराया गया। इसके बाद पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन को अन्य लोगों के नाम बेच दिया गया, जिससे पूरा मामला सुनियोजित जमीन घोटाले का रूप लेता दिख रहा है।प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले भी ऐसे मामलों में कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन इस तरह के नए खुलासे से राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी रिकॉर्ड इतने कमजोर हैं कि कोई भी पहचान बदलकर जमीन अपने नाम करा ले, या फिर इस पूरे खेल में अंदरूनी मिलीभगत है? बिलासपुर का यह मामला सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है।




