राज्य में सरकारी स्कीम से आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने वाले निजी अस्पतालों के लगभग 1200 करोड़ अटक गए हैं। गत वर्ष 2023 में विधानसभा की आचार संहिता के पहले ही प्राइवेट अस्पतालों का भुगतान रोक दिया गया था। हालांकि पिछले महीने करीब 250 करोड़ का भुगतान किया गया। लेकिन किसी अस्पताल को 20 तो किसी 50 हजार तक ही पेमेंट हुए। करीब 10 से 12 दिनों के भीतर पूरा बजट बंट गया। इस बीच अस्पतालों का बैलेंस फिर 12 सौ करोड़ के आस-पास पहुंच गया। लंबे समय से भुगतान अटकने से प्रदेश सहित बिलासपुर में अधिकांश अस्पताल बंद होने लगे हैं।

आईएमए के अध्यक्ष डॉक्टर विनोद तिवारी ने बताया कि इस गम्भीर समस्या के निदान के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सदस्यों ने स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर भुगतान की व्यवस्था बनाने मांग की। साथ ही कहा गया अगर भुगतान नही हुई तो कई अस्पताल बंद हो जाएंगे। आयुष्मान और डा. खूबचंद बघेल योजना के तहत फ्री इलाज का सिस्टम पिछले साल अगस्त सितंबर से ही गड़बड़ा गया है। नर्सिंग होम संचालकों से कहा गया था कि चुनाव की आचार संहिता लगने के पहले भुगतान कर दिया जाएगा। ऐसा नहीं हुआ। चुनाव के बाद आचार संहिता हटने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया।

इस बीच क्लेम की राशि करीब 12 सौ करोड़ रुपए हो गई। अस्पताल संचालकों की ओर से दबाव बनाने पर करीब ढाई सौ करोड़ का भुगतान किया गया। ये पैसे सभी अस्पतालों को बांटे गए। आश्वासन दिया गया था कि बाकी पेंडिंग का भी भुगतान जल्द कर दिया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक बार फिर लोकसभा चुनाव के मद्देनजर आचार संहिता लागू हो गयी है अब तो भुगतान हो पाना लगभग असंभव है।





