इल्युम बार में फिर खून-खराबा, चाकू हमले से युवक घायल,सिरगिट्टी पुलिस की कार्यवाही पर उठे गंभीर सवाल परिजनों ने लगाए लापरवाही और पक्षपात के आरोप, इल्युम बार की सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रश्नचिन्ह

सिरगिट्टी थाना क्षेत्र के तिफरा स्थित इल्युम बार में एक बार फिर विवाद और खून-खराबे का मामला सामने आया है। देर रात पार्किंग में हुई कहासुनी चाकूबाजी में बदल गई, जिसमें निलेश गेंदले गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना इल्युम बार की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है। पुलिस के अनुसार शिवानी खुटे और निलेश के बीच हुई कहासुनी के दौरान माहौल बिगड़ा और बीच-बचाव के लिए पहुंचे यश तिवारी ने आवेश में आकर निलेश के पेट में बटनदार चाकू से वार कर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और घटना में उपयोग चाकू भी जब्त किया है।लेकिन दूसरी ओर घायल के परिजनों का कहना है कि घटना बताने के नाम पर पहले उन्हें एक्सीडेंट की झूठी जानकारी दी गई। जब वे मौके पर पहुँचे तो निलेश खून से लथपथ हालत में मिला।

होश आने पर निलेश ने बताया कि बार के बाहर लड़के-लड़कियों के बीच हो रहे विवाद ने उसका रास्ता रोका और अचानक धक्का-मुक्की के बीच उस पर हमला कर दिया गया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस मौके से कुल सात लोगों दो लड़कियां और पाँच लड़के को थाने ले गई थी, लेकिन एफआईआर में सिर्फ चार के ही नाम दर्ज किए गए। उनका कहना है कि पुलिस द्वारा दिखाए गए फोटो के आधार पर घायल ने सभी की पहचान कर दी थी, फिर भी पूरे समूह के नाम रिपोर्ट में शामिल नहीं किए गए। परिजन मांग कर रहे हैं कि सभी आरोपियों पर समान रूप से कार्रवाई हो। इस घटना ने इल्युम बार की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब बार विवादों और हिंसा की वजह से सुर्खियों में आया हो। यहां सुरक्षा व्यवस्था की कमी, असामाजिक गतिविधियों और झगड़ों की शिकायतें पहले भी उठती रही हैं, लेकिन कड़ी कार्रवाई अब तक नजर नहीं आई।इसके साथ ही बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि इल्युम बार के अंदर नाबालिगों को प्रवेश आखिर किस आधार पर दिया जाता है।परिजनों का दावा है कि हमलावरों में कुछ युवक नाबालिग थे, जिससे बार प्रबंधन की लापरवाही उजागर होती है। क्या सिरगिट्टी पुलिस ने कभी इस दिशा में जांच की,क्या बार की परमिशन और सुरक्षा मानकों की वास्तविक जांच होती है।इन सवालों का जवाब अब जनता और पीड़ित परिवार दोनों तलाश रहे हैं।

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