आपदा मोचन बल यानि एनडीआरएफ, मंडल संरक्षा विभाग एवं रेल आपदा प्रबंधन टीम ने सवारी गाडियों के दुघर्टनाग्रस्त होने के कारण उत्पन्न हुई आपातकालीन स्थिति का जीवंत प्रदर्शन किया। बिलासपुर स्टेशन के एआरटी साईडिंग में हुए मॉक मे राहत एवं बचाव कार्य संबंधी सभी पहलुओं को बारीकी से देखा और परखा गया।
सवारी गाडियों के दुघर्टनाग्रस्त होने के कारण उत्पन्न हुई आपातकालीन स्थिति में कम से कम समय में राहत और बचाव कार्य का बुधवार को मॉक किया गया। बिलासपुर स्टेशन के एआरटी साईडिंग में हुए मॉक ड्रिल में घटनास्थल पर रेल दुर्घटना की वास्तविक स्थिति जैसी बनाकर मण्डल संरक्षा विभाग एवं एनडीआरएफ की टीमों द्वारा मॉक दुर्घटना में फंसे यात्रियों को राहत पहुंचाने एवं संबंधित क्रियाविधियों का सजीव अभ्यास किया गया। इस दौरान एसईसीआर के अधिकारी और डीआरएम प्रवीण पांडेय सहित रेलवे के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। मॉक का प्रदर्शन राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), मंडल संरक्षा विभाग एवं रेल आपदा प्रबंधन टीम द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। एनडीआरएफ के जवानों ने आपदा से पहले, आपदा के दौरान और बाद में रेस्क्यू के तरीकों को उदाहरण सहित बताया।



करीब डेढ़ घंटे तक चले कार्यक्रम के दौरान एनडीआरएफ ने लोगों की शंकाओं का समाधान भी किया। दुर्घटना के समय रक्तस्राव को रोकने, घायल व्यक्ति को तत्काल उपचार करने, हृदयाघात रोगी को तत्काल ऑक्सीजन यानि सीपीआर देने के साथ-साथ बचाव के उपाय बताए गए।इसके लिए सुरक्षा अधिकारी साजेत रंजन ने एसईसीआर, वरिष्ठ मंडल विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, छत्तीसगढ़ फायर ब्रिगेड विभाग, बिलासपुर स्वास्थ्य विभाग और यहां मौजूद आरपीएफ एवं स्काउट गाइड का आभार जताया।


मॉक ड्रिल के दौरान बुधवार की सुबह 10 बजे जब रेलवे का लगातार चार बार सायरन बजा तो पूरे रेलवे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सभी अधिकारी कर्मचारी घबराए और सहमे नजर आए, सभी एक दूसरे से यही पूछते रहे की कहां और कौन सी ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो गयी। पता चला कि एक यात्री ट्रेन में विस्फोट हुआ है जिसके दौरान यात्री घायल हो गए है। इसके चलते संकेत के रूप में सायरन बजाय गया है। हालांकि जब मॉकड्रिल की सच्चाई सबके सामने आई और पता चला कि मॉक ड्रिल का आयोजन किया है, तब जाकर सभी ने राहत की सांस ली। फिलहाल सभी के बीच उत्कृष्ट समन्वय के साथ दुर्घटना राहत एवं बचाव कार्य का अभ्यास सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस दौरान दुर्घटना राहत उपकरणों की कार्य पद्धति एवं आपदा प्रबंधन टीम की तत्परता और क्रियाशीलता परखी गयी।



