औपनिवेशिक परंपराओं पर विराम, गार्ड ऑफ ऑनर व्यवस्था में बड़ा बदलाव मुख्यमंत्री–मंत्रियों के दौरों में अब नहीं दी जाएगी औपचारिक सलामी

राज्य शासन ने औपनिवेशिक परंपराओं को समाप्त करने की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए गार्ड ऑफ ऑनर (सलामी गार्ड) की मौजूदा व्यवस्था में व्यापक संशोधन किया है। गृह (सामान्य) विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, अन्य मंत्रियों, पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामान्य दौरे, आगमन-प्रस्थान और निरीक्षण के दौरान सलामी देने की प्रथा समाप्त कर दी गई है। यह आदेश 19 दिसंबर 2025 से लागू हो गया है।

सरकार का कहना है कि इस फैसले से पुलिस बल की कार्यक्षमता बढ़ेगी और औपचारिकताओं से मुक्त होकर पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और जनसेवा जैसे मूल दायित्वों पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। हालांकि, राष्ट्रीय और राजकीय आयोजनों में इस निर्णय से छूट दी गई है।गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, पुलिस स्मृति दिवस और राष्ट्रीय एकता दिवस जैसे अवसरों पर सलामी गार्ड की व्यवस्था पूर्ववत रहेगी। साथ ही राज्यपाल सहित संवैधानिक पदों पर आसीन महानुभावों और विशिष्ट अतिथियों के लिए प्रोटोकॉल के तहत सलामी गार्ड की व्यवस्था जारी रहेगी।

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