कड़ी सुरक्षा के बीच केंद्रीय जेल में मनाया गया रक्षाबंधन, मेडिकल सहित प्राथमिक सुविधाओं की थी पूरी व्यवस्था।

कोरोना संक्रमण के चार साल बाद जेल प्रबंधन ने रक्षाबंधन पर्व पर बहनों की सुध ली है। इस बार पहले की तरह उनके भाईयों को राखी बांधने के लिए जेल के दरवाजे खोलने का फैसला लिया गया है। इसके लिए जेल प्रशासन ने परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किये। जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी ने जानकारी देते हुए बताया कि जेल की चार दीवारी में कैद बंदियों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से केंद्रीय जेल बिलासपुर बल के साथ छत्तीसगढ़ पुलिस एवं नगर सेना जैसी अतिरिक्त बल की भी व्यवस्था की गई है।

जो जेल प्रांगण के अंदर से लेकर बाहर तक चप्पे-चप्पे में तैनात सबकी निगरानी करते रहे। इसके साथ ही बांस के लकड़ियों का बैरिगेटिंग तैयार किया गया था। जिसके जरिये महिलाएं जेल प्रांगण में एक लाइन से प्रवेश करती दिखी। वहीं महिलाओं को बाहर से केवल मोती चूर एवं बेसन के लड्डू, पेड़े और राखी लाने की अनुमति दी गयी थी।

सभी महिलाओं की अलग अलग स्थानों में बारीकी से जांच कर उन्हें जेल के अंदर प्रवेश दिया गया। महिलाओं के लिए अतिरिक्त अंदर एवं बाहर चलित शौचालयों की व्यवस्था भी की गई थी। इसके साथ ही जेल के अंदर पानी के साथ पहली बार कूलर एवं पंखों के इंतजाम नजर आए। हर थोड़े देर में जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी भी तमाम सुरक्षा व्यवस्थाओं, साधन संसाधनों का अपने अफसरों के साथ निरीक्षण कर जायजा लेते हुए नजर आए।

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