कथावाचक ने दान मे मिली गाय की नही की देखभाल प्रसव पीड़ा से तड़पती रही गौ, गौ सेवक ने कि कार्रवाई की मांग

बिलासपुर में प्रसव पीड़ित गाय की मौत के मामले ने पशु उपचार व्यवस्था और गौ-संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौसेवकों ने आरोप लगाया कि गंभीर हालत में लाई गई गाय को पशु चिकित्सालय में उचित उपचार नहीं दिया गया। बताया गया कि डॉक्टर ने गाय को बेहोशी का इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद उसकी स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ती चली गई। इलाज में देरी और लापरवाही के कारण कुछ ही देर में गाय की मौत हो गई। जांच में सामने आया कि मृत गाय को पहले तारबहार डीपू क्षेत्र में रहने वाले कथावाचक जलेश्वर महाराज को दान में दिया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि कथावाचक ने गाय की देखभाल करने के बजाय उसे बेसहारा सड़क पर छोड़ दिया था। इसी लापरवाही के कारण गाय प्रसव पीड़ा में तड़पती हुई सड़क पर पाई गई और समय पर उचित देखभाल न मिलने से मां और गर्भस्थ बछड़े दोनों की जान चली गई। गौसेवकों ने घटना को बेहद संवेदनहीन और गंभीर लापरवाही करार दिया है। उनका कहना है कि यदि समय पर देखभाल और सही उपचार मिलता तो गाय की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने स्थिति की गंभीरता को समझने के बजाय लापरवाही दिखाई, जिसका खामियाजा एक बेजुबान को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। घटना से आक्रोशित गौसेवकों ने तारबहार थाने पहुंचकर कथावाचक सहित जिम्मेदार चिकित्सा कर्मचारियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त व्यवस्था लागू करने की मांग की है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

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