जहॉ पेड़ों को रंगने पर राज्य शासन द्वारा प्रतिबंध लगाते हुए दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश जारी किए हैं वहीं दुसरी ओर कलेक्टर कार्यालय में ही पेड़ों को रंग दिया गया है। ज्ञात हो की पेड़ों के तनों को रंगने से उसके छिद्र बंद हो जाते हैं जहॉ सें कार्बन डाई ऑक्साइड तथा आक्सीजन का आवागमन बाधित होता है ऐसे ही पेड़ों में विज्ञापन लगाने के लिये किलों का प्रयोग कर पेड़ों को छेद दिया जाता है जिससे जहां इन पौधे के माध्यम से पानी और घुले हुए खनिजों को जड़ों से पत्तियों तक ऊपर की ओर वितरित करने में मदद करता है और फ्लोएम भोजन को पत्तियों से जड़ों तक नीचे ले जाने में मदद करता है दोनों नष्ट हो जाते हैं और पेड़ सुखकर गिर जाता है यानी की पेड़ की हत्या हो जाती है।


पर्यावरण प्रेमियों ने इसका विरोध किया है कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए कहा गया है कि आज पूरा देश एक पेड मॉ के नाम पर लगा रहा है, पौधारोपण करना आसान है परन्तु उसकी देखभाल करना उतना ही आवश्यक भी है। पौधों को पेड़ बनने में पॉच से सात वर्ष लग जाते है, पौधारोपण के साथ साथ पौधों और पेड़ों का संरक्षण भी अनिवार्य है। उपरोक्त जानकारी जिला कलेक्टर बिलासपुर को देते हुए अरपा अर्पण महाअभियान “जन आंदोलन” द्वारा दोषियों पर कठोर कार्यवाही करने और पौधों से रंग को हटाने का निवेदन किया गया है।





