कोयला खदान प्रभावित भूविस्थापितों ने अलग- अलग मांगों को लेकर SECL मुख्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान मुख्यालय के मेन गेट को जाम करते हुए प्रबन्धन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। कोरबा, रायगढ़, चिरमिरी, बैकुंठपुर सहित अन्य खदान क्षेत्रों के भूविस्थापित आंदोलन प्रदर्शन में शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि, SECL ने कोयला खदान के लिए वर्षों पहले उनके जमीन का अधिग्रहण किया है, लेकिन भूविस्थापितों को विस्थापन का लाभ नहीं दिया जा रहा है। अब तक भूविस्थापित मुआवजा, रोजगार सहित पुनर्वास नीति से उपेक्षित हैं। लगातार आंदोलन, प्रदर्शन व मांग के बाद भी SECL प्रबंधन भूविस्थापितों के पुनर्वास को लेकर उदासीन बना हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन के साथ SECL प्रबंधन से मांग करते हुए कहा कि, कोल इंडिया पालिसी में रोजगार नीति वापस ली जाए। हर खाते में रोजगार दिया जाए। लंबित रोजगार के मामलों का तत्काल निराकरण हो। एक कंपनी एक नियम के तहत सबको विस्थापन का लाभ मिले। पुनर्वास ग्रामो का सर्वांगीण विकास किया जाए। आउटसोर्सिंग कम्पनी में 80 प्रतिशत स्थानीय भर्ती किए जाएं। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए मांगों को पूर्ण नहीं करने पर खदानों को बंद करने की भी चेतावनी दी है। इधर SECL प्रबंधन भूविस्थापितों से चर्चा करने और तय नीतियों के तहत विस्थापन का लाभ देने की बात कह रहा है।


