कोरबा में दंतैल हाथी का खौफ बरकरार 15 महीनों में 9 मौतें, पहचान व निगरानी पर उठे सवाल

कोरबा जिले में दंतैल हाथी के लगातार हमलों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। हैरानी की बात यह है कि पिछले 15 महीनों में 9 लोगों की जान लेने वाले इस दंतैल की अब तक पुख्ता पहचान नहीं हो सकी है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि हाथी इस वर्ष भी उसी रूट पर घूम रहा है, जहां से वह पिछले साल गुजर चुका है, बावजूद इसके स्थायी निगरानी व्यवस्था नहीं बन पाई है।शुक्रवार को गौरबोरा गांव में युवक को कुचलकर मारने के बाद दंतैल भटगांव होते हुए बेला जंगल की ओर बढ़ गया। बालको रेंज की वन टीम ने थर्मल ड्रोन से निगरानी का दावा किया, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि मुनादी के बाद नियमित ट्रैकिंग नहीं की गई, जिससे हाथी बार-बार बस्तियों में घुस रहा है।वन अधिकारियों के अनुसार दंतैल रोजाना करीब 20 से 25 किलोमीटर तक का सफर करता है और आमतौर पर शाम के समय सक्रिय होता है। बताया जा रहा है कि यही हाथी पिछले साल कटघोरा और बालको रेंज में भी जानलेवा हमलों में शामिल रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि झुंड से अलग दंतैल हाथी बेहद आक्रामक हो जाता है और उसकी 24 घंटे निगरानी जरूरी होती है।हाथी की गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने कॉफी प्वाइंट मार्ग बंद कर दिया है और बालको बैरियर से आगे आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई है। इस बीच वन मंडल क्षेत्र में करीब 15 हाथी सक्रिय बताए जा रहे हैं। बिलासपुर सर्किल के मुख्य वन संरक्षक मनोज पांडेय ने कहा कि दंतैल की पहचान कठिन है और फिलहाल ट्रैंकुलाइज करने की कोई योजना नहीं है, प्रयास है कि हाथी को वापस झुंड में मिलाया जाए।

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