कोरोना काल के बाद से प्रदेश के रेल यात्री अपने गंतव्य तक जाने के लिए ट्रेनों के लिए तरस रहे हैं। दरअसल रेलवे लंबे समय से एसईसीआर के अलग अलग मंडलों के अंतर्गत तीसरी लाइन, चौथी लाइन, कनेक्टिविटी और ऑटोमेटिक सिग्नल प्रणाली के तहत कामकाज का हवाला देकर यात्री ट्रेनें रद्द कर रहा है। आलम ये है कि जून के महीने में ही एसईसीआर बिलासपुर ने मेमू लोकल, पैसेंजर और एक्सप्रेस सहित लगभग 55 यात्री ट्रेनों को रद्द किया है।ऐसे में वर्तमान में गर्मी की छुट्टियां चल रही है। ऐसे में कुछ समय अपने फुर्सत के पल बिताने प्रदेश से बड़ी संख्या में लोग घूमने के लिए दीगर राज्य जा रहे है। ऐसे में भीषण गर्मी के समय इस तरह से ट्रेनों को रद्द करना यह दर्शाता है कि रेलवे को प्रदेश वासियों से जरा भी सरोकार नही है। बिलासपुर सहित प्रदेश की जनता रेलवे से सवाल पूछ रही है कि क्या इससे पहले रेल प्रशासन ने कामकाज नही किया है। पहले तो काम भी होते थे और ट्रेनें भी चलती थी।लेकिन अब तो अलग अलग काम का हवाला देकर यात्री ट्रेनों को रद्द कर दिया जाता है।



लोगों का मानना है कि जब कामकाज हो रहे है और यात्री ट्रेनें रद्द हो रही है तो फिर मालगाडियां कैसे पटरियों पर दौड़ रही है। यह भी दर्शाता है कि रेलवे को यात्री ट्रेनों से नही बल्कि माल लदान से मुनाफा होता है। इसलिए आज के समय पटरियों पर मालगाडियां दौड़ रही है और यात्री ट्रेनें रद्द हो रही है। यही वजह है कि अब तो रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मों पर भी सन्नाटा पसरने लगा है। स्टेशन में यात्री भी नजर नही आ रहे है। हालांकि इस सम्बंध में जब एसईसीआर बिलासपुर के सीपीआरओ से बात की गई तो सुनिए उन्होंने किस तरह से काम का हवाला देकर ट्रेनों को रद्द करने की बात कहते हुए गोलमोल जवाब दिया।


