
नवरात्रि की भक्ति और उल्लास के बीच अब सवाल उठने लगे हैं कि गरबा-डांडिया उत्सव आस्था का मंच है या करोड़ों का धंधा? बिलासपुर समेत पूरे प्रदेश में भव्य आयोजनों की चमक-दमक के पीछे टैक्स चोरी, सुरक्षा संकट और कारोबार का काला सच सामने आ रहा है।नगर निगम सभापति विनोद सोनी ने सीधे शब्दों में आयोजकों पर निशाना साधते हुए कहा कि आस्था की आड़ में खुलेआम धंधा चल रहा है। देर रात तक हो रहे आयोजनों से महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।

सोनी ने प्रशासन से इन आयोजनों का समय तय करने और नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग की।वहीं MIC मेंबर और पार्षद विजय ताम्रकार ने गरबा डांडिया को रेट कार्ड वाला बिजनेस करार दिया।उन्होंने खुलासा किया कि आयोजक लाखों रुपये की VIP टेबल्स बेच रहे हैं और बॉलीवुड सेलिब्रिटीज को बुलाकर मोटी कमाई कर रहे हैं। ताम्रकार ने साफ कहा ये अब सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शुद्ध व्यवसाय है।साथ ही उन्होंने आयोजनों में GST की भारी गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन और जीएसटी विभाग से तत्काल जांच की मांग की।

मामले पर बिलासपुर GST विभाग के जॉइंट कमिश्नर एम.के. धनेलिया ने भी माना कि उन्हें इस पूरे खेल की जानकारी मीडिया से मिली है। उन्होंने साफ किया कि अब आयोजकों से हर खर्च और टैक्स का ब्योरा मांगा जाएगा। कितनी VIP टेबल बिकीं, सेलिब्रिटी को कितना भुगतान किया गया और GST कितना जमा हुआ सबकी जांच होगी।स्पष्ट है कि इस बार गरबा डांडिया सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहे, बल्कि करोड़ों का कारोबार बन चुके हैं।

सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए टिकट और पैकेज तो खुलेआम बेचे जा रहे हैं, लेकिन मनोरंजन कर और GST की सही वसूली नहीं हो रही। अब सवाल यह है कि प्रशासन कब तक आंख मूंदे बैठेगा और कब इन आयोजनों पर लगाम कसेगा।


