
बिलासपुर शहर में सिखों के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत की 350वीं वर्षगांठ बड़े धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर दो दिवसीय भव्य धार्मिक आयोजन किए गए, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। सितम्बर को शहीदी नगर कीर्तन का आयोजन हुआ। इसकी शुरुआत गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, दयालबंद से हुई।

नगर कीर्तन शहर के प्रमुख मार्गों और चौक-चौराहों से होते हुए निकला, जहां श्रद्धा और भाईचारे का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।नगर कीर्तन में झांकियां, पंज प्यारे, धार्मिक जत्थे और कीर्तन दल शामिल हुए। शोभायात्रा के दौरान नगरवासियों ने जगह-जगह श्रद्धालुओं का स्वागत किया और सेवा केंद्रों पर लंगर, शरबत और फल वितरण कर सेवा भाव प्रदर्शित किया।

18 सितम्बर को गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, दयालबंद में गुरमत समागम का आयोजन किया गया। इसमें भाई बलवंत सिंह दमदमी टकसाल, भाई गुरप्रीत सिंह जी और ज्ञानी राजदीप सिंह जी ने संगत को गुरबाणी के माध्यम से निहाल किया।हजारों श्रद्धालु गुरमत समागम में पहुंचे और आध्यात्मिक रस का अनुभव किया।

इस दौरान गुरुओं की शिक्षाओं, त्याग और शहादत को जन-जन तक पहुँचाने का संदेश दिया गया।गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने आयोजन की सफलता पर संगत और नगरवासियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक कार्यक्रम समाज में एकता, भाईचारे और मानवीय मूल्यों को मजबूत बनाने का माध्यम हैं।

दो दिवसीय आयोजन ने न केवल गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को यादगार बना दिया बल्कि पूरे शहर को भक्ति और श्रद्धा के वातावरण से सराबोर कर दिया।


