
बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर के पथरागुड़ा में आदिवासी ध्रुव गोड़ एवं अन्य सहयोगी समाज के द्वारा प्रति वर्ष की भाती इस वर्ष भी देवो के देव बुढ़ा देव और मां पार्वती की शादी की साक्षी बने। इस विषय पर आगे जानकारी देते हुए ध्रुव समाज के वरिष्ठ सदस्य रामनारायण ध्रुव ने बताया कि ईसर गौरा गौरी विवाह महा पर्व बड़े धुम धाम से मनाया गया जिसमें शहर वासी सैकड़ों की संख्या में ईसर गौरा की शादी में शामिल होकर नाचते गाते हुए ईसर गौरा की जय कारा लगाते हुए बाजे गाजे एवं बम फाटकों के साथ उनका स्वागत कर इस पर्व में महिलाएं घर घर जाकर कलश लेकर लम्बी कतारों में चलते हुए ऐसे लगते है मानो अपने इष्ट देव की विवाह में शामिल होकर अपने आप को धन्य समझती है, इस पावन पर्व को मनाने के पीछे प्राचीनकाल से ऐसी मान्यता है कि नया फसल आने की खुशी में नया धान की बाली ईसर गौरा को भेट कर अच्छी फसल की कामना करते हुए अपने इष्ट देव की आराधना करते हैं ऐसी मान्यता है कि ईसर गौरी की शादी के बाद ही आदिवासी समाज में लोग अपने बच्चों की शादी करते है,यह भी मान्यता है कि सुरोंती की रात से ही मौसम में बदलाव दिखने लगता है ठंड का अहसास होने लगता है, यह त्योहार एक सप्ताह पहले से तैयारी कर ली जाती है लिपाई पुताई कर घरों मे रंग रोगन कर घर को साफ सुथरा किया जाता है ईसर राजा की शादी में कोई कसर न हो इस बात की पूरी सावधानी बरती जाती है दूसरे दिन विसर्जन का कार्यक्रम होता है जिसमें महिलाएं पुरुष नाचते कूदते हुए अपने आराध्य देव को विसर्जन किया जाता है इस मौके पर बड़ी संख्या में सामाजिक सदस्य सहित गणमान्य सदस्य उपस्थित होकर इस महत्ती कार्य को निभाने में महत्वपूर्ण योगदान दिए।


