
छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती के उपलक्ष्य में जिला प्रशासन द्वारा प्रार्थना सभा भवन में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 25 से अधिक नामी-गिरामी कवियों ने राज्य की संस्कृति और विकास यात्रा को गीतों व कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए.डी.एन. वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार सतीश जायसवाल ने अध्यक्षता की, जबकि वरिष्ठ पत्रकार और कवि नंद किशोर शुक्ल, राजेश चौहान, डॉ. अजय पाठक और श्रीमती रश्मिलता मिश्रा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।मुख्य अतिथि डॉ. वाजपेयी ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की शुरुआत से ही एक अलग पहचान रही है। पिछले 25 वर्षों में राज्य ने सड़क, शिक्षा, विज्ञान और आमदनी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि अब राज्य को उपभोक्ता से उत्पादक राज्य की दिशा में आगे बढ़ना होगा और इसके लिए उद्यमिता व नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी है। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि रजत महोत्सव आत्मचिंतन का अवसर है। हमें देखना होगा कि पिछले 25 सालों में हम कितनी दूर आए हैं और भविष्य की राह कैसी होगी। उन्होंने कहा कि नई तकनीक और नवाचार को अपनाकर ही राज्य आगे बढ़ सकता है।गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकारों और नवोदित कवियों ने लगभग पांच घंटे तक अपनी कविताओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति, भाषा और अस्मिता का चित्रण किया। डॉ. सुप्रिया भारतीयन, डॉ. देवधर महंत, महेश श्रीवास, तुलसी देवी तिवारी, राघवेन्द्र दुबे, रश्मि गुप्ता सहित अनेक कवियों ने मंच से काव्य पाठ किया। कवियों को जिला प्रशासन की ओर से शॉल और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया। कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क विभाग की जिला समन्वयक रेहाना तबस्सुम और वरिष्ठ साहित्यकार सुनील शर्मा ‘प्रकाश’ ने किया।


