जिला प्रशासन की उदासीनता और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते बिलासपुर जिले में डायरिया और मलेरिया तेजी से फैल रहा है। बीमारी का फायदा उठाकर झोलाछाप डॉक्टर भी ग्रामीण क्षेत्रो में सक्रिय हो गए है। जिनके गलत इलाज के चलते लोगों की जान भी जा रही है। इसी तरह एक बड़ी खबर कोनी थाना क्षेत्र के रमतला से सामने आ रही है। जहां झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज के चलते पूरे घर को चलाने वाले इकलौते कमाऊ पूत की जान चली गयी। मृतक की पत्नी एवं उनके परिवार वालों ने झोलाछाप डॉक्टर जय भारद्वाज पर गम्भीर आरोप लगाते हुए उन्हें ही मौत का जिम्मेदार बताया। रमतला निवासी मृतक दयाल खरे की पत्नी सुभद्रा खरे ने रोते बिलखते हुए बताया कि उनके पति सत्या प्लांट में काम करते थे। वे बीते 6 जुलाई को काम से वापस आये तो उनकी तबियत बिगड़ी हुई थी।

जिसके बाद घरवालों ने रमतला के ही डॉक्टर जय भारद्वाज को इलाज करने घर बुलाया। जहां झोलाछाप डॉक्टर ने ना केवल गलत उपचार किया बल्कि मृतक को गलत तरीके से लगातार दो बार इंजेक्शन भी दे दी। जिसके बाद दयाल खरे की तबियत और ज्यादा बिगड़ गयी और वे दर्द से तड़पने लगे थे। बताया जा रहा है कि झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज से दयाल खरे की मौत घर पर ही हो गयी थी। लेकिन झोलाछाप डॉक्टर ने अपना बचाव करते हुए झूठ बोलकर मृतक को जिंदा बताया और कहा इसे सिम्स ले जाओ और वहां भूलकर भी ये मत कहना कि इनका इलाज गांव के डॉक्टर से कराएं है अन्यथा वे इलाज नही करेंगे। हालांकि जब परिवार वाले दयाल खरे को सिम्स लेकर पहुंचे तो वहां चिकित्सको ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इसके बाद परिवार वालों ने भी विधि विधान से मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया। हालांकि जब उन्हें बाद में समझ आया कि मृतक दयाल खरे की जान झोलाछाप डॉक्टर की वजह से गयी है तो उन्होंने आईजी और एसपी को ज्ञापन सौंप मामले में निष्पक्ष जांच कर कार्यवाही की मांग की। जिसके आधार पर 21 जुलाई को जिला एवं पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में कब्र खोदकर लाश निकालकर उसका पोस्टमार्टम किया जायेगा, जिसके बाद दोषी डॉक्टर पर कार्यवाही भी की जाएगी।






