Homeहमर बिलासपुरतृतीय दिवस भगवत गीता सार खुशहाल जीवन का आधार का शुभारम्भ सरकण्डा...

तृतीय दिवस भगवत गीता सार खुशहाल जीवन का आधार का शुभारम्भ सरकण्डा थाना प्रभारी श्री प्रदीप आर्य एवं श्रीमती संगीता नेताम प्रधान आरक्षक द्वारा दीप प्रज्जवलन कर किया गया

कथावाचक ब्र.कु. भारती दीदी ने भगवान के वास्तविक स्वरूप का परिचय व दर्शन कराया । ईश्वर को याद करने वाले चार प्रकार के जन है। पहला धन की प्राप्ति हेतु भगवान की याद । दूसरा संकट निवारण से मुक्ति हेतु याद करने वाले । तीसरा जिज्ञासा वश याद और चौथा ज्ञानी आत्मा जो भगवान के वास्तविक स्वरूप को प्रभुपरायन होकर याद करते हैं I ऐसे ज्ञानी के स्वरूप में परमात्मा का स्वरूप दिखता है।

जिसकी बुद्धि जितनी शुद्ध और पवित्र होगी उतना ही वह परमात्मा को प्राप्त करेगा। परमात्मा को इन चर्म चक्षुओं से नहीं देख सकते । भगवान वह है जो सर्वमान्य है हिन्दू धर्म में सबसे ज्यादा मंदिर भोले बाबा शिव के है सबसे ज्यादा पूजा शिवजी की होती है रामेश्वर और गोपेश्वर के मंदिर में श्रीराम और श्रीकृष्ण द्वारा शिवजी की पूजा करते हुए दर्शित है।

अर्थात् श्रीराम और श्रीकृष्ण के भी ईष्ट भगवान शिवजी हैं महाकालेश्वर , ओमकारेश्वर , त्र्यम्बकेश्वर ,विश्वेश्वर , नागेश्वर , सोमनाथ , विश्वनाथ , अमरनाथ , केदारनाथ , वैद्यनाथ , पशुपतिनाथ परमात्मा शिवजी के गुणवाचक एवं कर्तव्य वाचक नाम है। ईसाई धर्म संस्थापक ने कहा प्रभु लाईट है इसलिए गिरजा घरों में कैण्डल लाईटिंग की जाती है। सिक्ख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देवजी ने परमात्मा को एक ओमकार निराकार कहा । मुस्लिम धर्म में ईश्वर को नूर ए इलाही कहा ।

इस प्रकार निराकार शिवजी सर्वमान्य भगवान है। वही सर्व आत्माओं का परमपिता है। जिसका धाम परमधाम है जहाँ सूर्य चांद तारागण का प्रकाश नहीं है। वहाँ शिवजी का स्वर्णिम लाल प्रकाश है । ब्रह्मा देवताएं नमः , विष्णु देवताएं नमः , शंकर देवताएं नमः किंतु शिव परमात्मायें नमः अर्थात् शिव परमात्मा भगवान है ।भगवान को मान रहे हैं किन्तु भगवान का सुनते नहीं इसलिए दुःख दूर नहीं हो रहे। वो परमात्मा सुख शांति आनंद प्रेम ज्ञान शक्ति पवित्रता के सागर , गुणों के भण्डार और सर्वशक्तिमान है। वही मात पिता बंधु सखा है।

शिवजी का ध्यान करना , स्मरण करना है और देवी देवताओं के चरित्र को धारण करना है। घरों में देवी देवताओं का चित्र लगाये जिससे दैवी गुणों की प्रेरणा मिल सकें। यदा यदा ही धर्मस्य . . . परमात्मा का अवतरण अधर्म का विनाश और सद् धर्म की स्थापना हेतु होता है उनके दिव्य अवतरण से काम कोध लोभ मोह अहंकार के विकार समाप्त हो जाते हैं। देवताओं की पूजा करने वाले देवताओं को प्राप्त करते , पितरों को स्मरण करने वाले पितरों को प्राप्त करते और परमात्मा को ज्ञानयोग के आधार से याद करने वाले सदाशिव परमात्मा को प्राप्त करते हैं। भगवत कथा संध्या आरती में रायपुर छत्तीसगढ़ से भ्राता माननीय हर्ष कुमार पाठक एडिशनल कलेक्टर ,एवं प्रवेश पटवा प्रदेश चेयरमेन नामदेव सोसायटी रायपुर छत्तीसगढ़ से तथा तालापारा शिवदर्शन सेवाकेंद्र के .रमा दीदी एवं सरकंडा क्षेत्र की बीके मधु दीदी शामिल हुये ।

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