
दीपावली और छठ पर्व पर घर लौटने की तैयारी करने वाले यात्रियों के लिए इस बार भी सफर आसान नहीं है। छत्तीसगढ़ से मुंबई और हावड़ा रूट की अधिकांश नियमित ट्रेनें अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े तक पूरी तरह फुल हो चुकी हैं। ऐसे में जिन यात्रियों ने समय रहते टिकट नहीं कराया, उनके लिए अब केवल पूजा स्पेशल ट्रेनें ही सहारा बची हैं।छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में मजदूर, कर्मचारी और छात्र मुंबई, पुणे, कल्याण, थाणे और वसई-विरार जैसे शहरों में काम करते हैं। त्योहारों पर वे साल में एक-दो बार गांव लौटते हैं, लेकिन इस बार उन्हें भारी निराशा हाथ लग रही है। हावड़ा मेल, एलटीटी-शालीमार, समरसता सुपरफास्ट जैसी प्रमुख गाड़ियां लगातार ‘नो रूम’ और लंबी वेटिंग में चल रही हैं।हावड़ा रूट की स्थिति भी अलग नहीं है। पश्चिम बंगाल लौटने वाले यात्रियों को भी कठिनाई होगी। हावड़ा-मुंबई मेल, गीतांजलि , शालीमार-एलटीटी और हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस पूरी तरह फुल हैं। इससे प्रवासी मजदूरों और कर्मचारियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश लौटने वाले हजारों परिवारों के लिए दुर्ग-छपरा सारनाथ एक्सप्रेस ही मुख्य सहारा है, लेकिन यह ट्रेन भी अक्टूबर भर वेटिंग और नो रूम से जूझ रही है। अब देखना यह होगा कि रेलवे यात्रियों की भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त पूजा स्पेशल ट्रेनें चलाता है या नहीं।


