
बिलासपुर के हटरी चौक स्थित लगभग 150 वर्ष पुराने श्री राम जानकी हनुमान मंदिर के कपाट इस वर्ष भी परंपरा के अनुसार केवल दशहरे के दिन के लिए खोले गए। साल भर बंद रहने वाला यह मंदिर भक्तों के लिए आस्था और श्रद्धा का अद्वितीय केंद्र है। इस विशेष अवसर पर सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी और मंदिर परिसर “जय श्री राम” और “पवनसुत हनुमान की जय” के नारों से गूंज उठा।

मंदिर के व्यवस्थापकों ने बताया कि यह प्राचीन धरोहर केवल एक दिन के लिए ही खोली जाती है, जिसे स्थानीय परंपरा और आस्था से जोड़ा जाता है। दशहरे के दिन कुछ घंटों के लिए खुलने वाले मंदिर में दर्शन के लिए लोगों को लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। इसके बावजूद भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। मंदिर में श्री राम, माता सीता और हनुमान जी की मूर्तियों का विशेष श्रृंगार किया गया। भक्तों ने हाथ जोड़कर आरती में भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया।

दर्शन करने आए श्रद्धालुओं का कहना था कि साल में एक दिन मिलने वाला यह अवसर उनके लिए किसी पर्व से कम नहीं है। कई लोगों ने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताया। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। मंदिर प्रशासन ने बताया कि यहां हिंदू ही नहीं बल्कि अन्य धर्मों के लोग भी दर्शन करने आते हैं और अपने-अपने तरीके से प्रार्थना करते हैं। यह दृश्य भारत की गहरी धार्मिक विविधता और पारस्परिक सम्मान की परंपरा को दर्शाता है।

दशहरे के दिन इस मंदिर का खुलना स्थानीय लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण आयोजन होता है। आसपास की दुकानों और रास्तों को सजाया जाता है, वहीं भक्तों के लिए भंडारे और प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इसमें उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। भक्तों ने भगवान से अपने परिवार और शहर की सुख-समृद्धि की कामना की और प्रार्थना की कि यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रहे। कहा जा सकता है कि हटरी चौक का यह प्राचीन मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का जीवंत प्रतीक है।


