नशेड़ी दीपक ठाकुर ने मामूली विवाद में की राहुल सिंह चौहान की हत्या, 18 दिन बाद पुलिस की गिरफ्त में

दयालबंद निवासी राहुल सिंह चौहान एक स्थानीय केबल टीवी नेटवर्क में काम करता था। 25 अगस्त की शाम वह अपना काम खत्म कर अपने दोस्त सद्दाम का बर्थडे बनाने पुराना बस स्टैंड गया था। बर्थडे मनाने के बाद बाकी दोस्तों तो लौट गए लेकिन राहुल वहीं रुक गया। इसी दौरान उसका वही किसी नशेड़ी से विवाद हुआ जिसने शराब की बोतल फोड़ कर उसके गले पर वार कर दिया, जिससे राहुल सिंह चौहान की मौत हो गई । उस समय आसपास कुछ लोग मौजूद थे। पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी लगी हुई थी लेकिन पुलिस आरोपी की पहचान नहीं कर पाई क्योंकि सीसीटीवी फुटेज स्पष्ट नहीं थे। इसे लेकर लगातार पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठ रहे थे, हालांकि पुलिस ने कुछ ही दिनों में आरोपी की जानकारी जुटा ली थी, मगर आरोपी उनके हाथ नहीं लग रहा था। इसी दौरान अभिषेक सिंह से दीपक ठाकुर उर्फ बाबा ने शराब पीने के लिए पैसे मांगे और पैसे न देने पर उसने चाकू से अभिषेक पर हमला करते हुए यह दावा किया कि वह, वही है जिसने पुराना बस स्टैंड में राहुल सिंह चौहान की हत्या की थी। इस घटना से यह स्पष्ट हो गया कि राहुल सिंह चौहान का हत्यारा कोई और नहीं सरकंडा बहतराई चौक अटल आवास में रहने वाला नशेड़ी दीपक ठाकुर उर्फ बाबा ही है, लेकिन वह इतना शातिर था कि बार-बार अपना लोकेशन बदल देता था। बताते हैं कि हत्या की घटना को अंजाम देने के बाद दूसरे ही दिन उसने शहर बदल लिया था, हालांकि वह नशे का आदी था और उसे उसकी तलब होती थी। जिला अस्पताल में नशा मुक्ति के लिए उसका इलाज भी चल रहा था। वह नशा मुक्ति के लिए प्राप्त दवाई का भी अधिक मात्रा में डोज लेकर नशा करता था। पुलिस से बचने के लिए वह भाटापारा में छुपा हुआ था। बुधवार को एक बार फिर से दवा लेने वह जिला अस्पताल पहुंचा। पुलिस को इसकी सूचना पहले से मिल गई थी और वह उसका इंतजार रेलवे स्टेशन पर कर रही थी, लेकिन शातिर दीपक ठाकुर पार्सल ऑफिस गेट से बाहर निकला। फिर ऑटो में बैठकर जिला अस्पताल पहुंचा लेकिन इसकी खबर लगने पर पुलिस ने उसे वहीं दबोच लिया। इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि हत्यारे दीपक ठाकुर उर्फ बाबा की जान पहचान राहुल से थी जरूर लेकिन दोनों के बीच बेहद मामूली विवाद हुआ था और इसी विवाद में उसने तैश में आकर उसकी हत्या कर दी थी।

आरोपी दीपक ठाकुर शराब , नशीली गोली, इंजेक्शन लेने का आदि है। वह शातिर अपराधी भी है। उसके खिलाफ सरकंडा और तोरवा थाने में कई मामले दर्ज है, जिसमें अवैध शराब बिक्री, शराब दुकान के बाहर पर्स चोरी और अन्य तरह की चोरी के मामले हैं। वह नशे का इतना आदि था कि नशा नहीं मिलने पर वह किसी की भी जान लेने पर उतारू हो जाता था। बिलासपुर में एक हत्या और चाकू बाजी की घटना को अंजाम देने के बाद वह भाटापारा में छुपा हुआ था। करीब 18 दिनों तक पुलिस को छकाने के बाद आखिरकार वह पुलिस के हत्थे चढ़ ही गया, जिसके बाद पुलिस ने भी राहत की सांस ली है।

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