
शहर और आसपास की सड़कों की हालत बद से बदतर हो चुकी है। पिछले तीन सालों से जर्जर और गड्ढों से भरी सड़कों पर भारी वाहन फर्राटे भर रहे हैं, जिससे धूल और मिट्टी का अंबार लग गया है। हालात ऐसे हैं कि लोगों का चलना तक दूभर हो गया है, साथ ही धूल के कारण सांस संबंधी बीमारियों में भी इजाफा हो रहा है। जूना बिलासपुर से गांधी चौक, पावरहाउस और धानमंडी रोड जैसी मुख्य सड़कें पीडब्ल्यूडी विभाग की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी हैं।वहीं विभाग शहर की मरम्मत छोड़ दूर के इलाकों की सड़कों की स्वीकृति दिखाकर वाहवाही लूट रहा है। हाल ही में दो सड़क निर्माण कार्यों के लिए करोड़ों रुपए की मंजूरी दी गई है, जबकि शहरवासी रोजाना टूटी-फूटी सड़कों पर जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं।हाईकोर्ट के संज्ञान में आने के बाद भी विभाग की नींद नहीं खुली है। शहर के बीचोंबीच सड़कें ऐसी हालत में हैं कि आए दिन हादसे हो रहे हैं, लेकिन अधिकारी बेफिक्र हैं। जनता की शिकायतें फाइलों में दब जाती हैं, और कार्रवाई के नाम पर केवल बैठकों और कागजी रिपोर्टों का खेल चलता है।जब इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के ईई सीएस विंध्यराज से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सभी सड़कें 31 दिसंबर तक दुरुस्त हो जाएंगी।उनका जवाब सुनकर ऐसा लगा मानो अगले दिन से ही सड़कें नई हो जाएंगी, लेकिन शहरवासी अब विभाग के वादों से ऊब चुके हैं। सवाल यही है कि क्या इस बार भी तारीखें बदलेंगी, या सच में सड़कों की तस्वीर बदलेगी।


