बिलासपुर पुलिस की चूक से बछिया को कुचल कर मार देने का मामला तूल पकड़ चुका है। इसी मुद्दे पर गुरुवार को शिवसेना, गौसेवक और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने एसपी कार्यालय का घेराव करते हुए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। बिलासपुर पुलिस ने वही भूल की जो इससे पहले बलौदा बाजार भाटापारा की पुलिस कर चुकी है। साधारण जख्म पर पुलिस समय से मरहम लगाती तो घाव को खत्म किया जा सकता था लेकिन पुलिस ने अपनी ही गलतियों से इसे नासूर बना दिया। घटना के अगले ही दिन यानी बुधवार सुबह को ही पुलिस को यह भली भांति पता था कि आरोपी कौन है लेकिन पुलिस कभी मोटर व्हीकल एक्ट लगाने , कभी बछिया के मालिक को खोज कर उसके द्वारा शिकायत करने, तो कभी लापरवाही पूर्वक वाहन चलाने जैसी दलील देकर यह इंतजार करती रही कि आरोपी शेख शाहिद को भगाने का मौका मिल जाए और जब वह भाग गया तो पुलिस उसे ढूंढने एड़ी चोटी का जोर लगा रही है।



एक दिन पहले तारबाहर क्षेत्र में देर रात कार चालक शेख शाहिद ने सड़क पर बैठी बछिया को अपनी कार से कुचल दिया। सीसीटीवी फुटेज से साफ समझ आ रहा है कि यह कोई सड़क हादसा नहीं, बल्कि पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से की गई हत्या है। यही कारण है कि गौ सेवक और हिंदूवादी संगठन के लोग नाराज है। पुलिस की कार्यशैली ने इसमें आग में घी का काम किया। पुलिस आरोपी का नाम लेने से भी बचती रही। यही कारण है कि आंदोलनकारी पुलिस पर पुष्टिकरण का आरोप लगा रहे है, जिन्होंने कहा कि सरकार भले बदल गई लेकिन सिस्टम नहीं बदला। बुधवार सुबह से पुलिस को पता था कि आरोपी कौन है, इसके बावजूद उसने आरोपी शेख शाहीद को गिरफ्तार नहीं किया। इस कारण उसे भगाने का मौका मिल गया। अब जब गुरुवार को सैकड़ो गौ सेवक और शिव सैनिक एसपी कार्यालय का घेराव करने पहुंचे तो फिर पुलिस के होश फाख्ता हो गए। आंदोलनकारियो ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए 24 घंटे के भीतर मटन दुकान चलाने वाले आरोपी शेख शाहीद को गिरफ्तार करने की मांग की है। ऐसा न होने पर गौ सेवक अन्न जल त्याग कर कलेक्ट्रेट सड़क पर धरना प्रदर्शन की बात कह रहे हैं। आंदोलनकारी यह भी चाहते हैं कि गौ हत्या करने वाले शेख शाहीद के तारबाहर स्थित अवैध मटन दुकान पर बुलडोजर चलाया जाए।



एक मामूली से मटन दुकान चलाने वाले आरोपी को ना पकड़ सकने वाली बिलासपुर पुलिस ने गोसवेकों पर आंसू गैस छोड़ने की तैयारी करने में जरा भी वक्त नहीं लगाया। गुरुवार को आंदोलनकारियो को सबक सिखाने के लिए एक लंबे अरसे बाद बिलासपुर पुलिस आंसू गैस के साथ तैनात नजर आयी। अब सांप जाने के बाद लाठी पीटने की तर्ज पर पुलिस कह रही है कि अलग-अलग टीम बनाकर आरोपी शेख शाहीद को पकड़ने की कोशिश हो रही है।



जो काम आसानी से हो सकता था पुलिस ने उसे खुद कठिन बना दिया। सब कुछ पता होने के बाद भी एफआईआर से लेकर प्रेस रिलीज में भी जिस तरह से आरोपी के नाम को छुपाया गया, उसे गिरफ्तार नहीं गया नहीं किया गया, इससे पुलिस पर तुष्टीकरण के आरोप लग रहे हैं। पुलिस चाहती तो बुधवार को ही आरोपी को गिरफ्तार कर स्थिति को बिगड़ने से बचा सकती थी लेकिन पुलिस ने इस संवेदनशील मामले को उफान तक आने दिया। बिलासपुर के पुलिस कप्तान छुट्टी पर है। इधर तारबाहर थाना प्रभारी भी छुट्टी पर चले गए ।ऐसी स्थिति में प्रभारी एडिशनल एसपी उमेश कश्यप के लिए इस चुनौती से पार पाना आसान नहीं है। फिलहाल यह मामला बिलासपुर से बढ़कर पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है, इसलिए पुलिस को जल्द से जल्द आरोपी को गिरफ्तार करना होगा, नहीं तो यह विवाद यही नहीं ठहरेगा।


