
बिलासपुर। खरीफ सीजन की फसलें अब अपने अंतिम दौर में हैं, लेकिन बदलते मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आसमान में लगातार मंडराते बादल और ठंडी हवाओं ने धान की फसलों के लिए प्रतिकूल माहौल बना दिया है। खेतों में पकने को तैयार फसलें अब विभिन्न रोगों की चपेट में आने लगी हैं। कई इलाकों में धान की बालियों पर भूरे माहो और फफूंद रोग का असर देखा जा रहा है, जिससे पैदावार पर खतरा मंडराने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार बरसात देर तक रहने और तापमान में गिरावट की वजह से खेतों में नमी बनी हुई है, जो रोगों के प्रसार का कारण बन रही है। खेतों में अधिक नमी और ठंडी हवाएं धान की फसल के लिए नुकसानदेह साबित हो रही हैं। कई जगहों पर पत्तियों का रंग बदलने लगा है और पौधों में सड़न की स्थिति दिखाई दे रही है। इससे धान की गुणवत्ता और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उप संचालक कृषि पी.डी हाथेश्वर ने किसानों को सलाह दी है कि वे नियमित रूप से अपने खेतों का निरीक्षण करें और आवश्यकता पड़ने पर कृषि विभाग के संपर्क में रहकर दवाइयों का छिड़काव करें। उन्होंने कहा कि समय रहते दवा का उपयोग करने से फसल को काफी हद तक बचाया जा सकता है। विभाग द्वारा किसानों को जागरूक करने के लिए ग्रामीण स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि भूरे माहो का हमला उनके लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गया है क्योंकि इसका असर खेत के पूरे हिस्से पर दिखता है। जहां-जहां ये कीट लग रहे हैं, वहां फसल काली होकर सूखने लगी है। किसान विभाग से लगातार दवा उपलब्ध कराने और फसलों के लिए प्रभावी नियंत्रण उपायों की मांग कर रहे हैं। अगर मौसम में सुधार नहीं हुआ तो इस बार की उपज पर बड़ा असर पड़ सकता है।


